पंचांग 13 जुलाई 1999
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
13 जुलाई 1999 · मंगलवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:05
सूर्यास्त19:14
चंद्रोदय06:07
चंद्रास्त19:33
- मास:
- ज्येष्ठ (अमांत) · आषाढ़ (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1921 · विक्रम (चैत्रादि) 2056
- संवत्सर:
- प्रमाथी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- ग्रीष्म · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मिथुन
- चंद्र राशि:
- मिथुन 13:45 तक, फिर कर्क
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- मंगलवार
- तिथि
- कृष्ण अमावस्या 07:53 तक, फिर शुक्ल प्रतिपदा 05:08 (14 जुल॰) तक, फिर शुक्ल द्वितीया 02:51 (15 जुल॰) तक
- नक्षत्र
- पुनर्वसु 19:15 तक, फिर पुष्य 17:32 (14 जुल॰) तक
- योग
- व्याघात 08:36 तक, फिर हर्षण 05:17 (14 जुल॰) तक, फिर वज्र 02:23 (15 जुल॰) तक
- करण
- नाग 07:53 तक, फिर किंस्तुघ्न 18:27 तक, फिर बव 05:08 (14 जुल॰) तक, फिर बालव 15:55 (14 जुल॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:13 – 13:06
- राहु काल15:57 – 17:36
- यमगंड09:22 – 11:01
- गुलिक काल12:40 – 14:18
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- रोग(वर्जित (परंपरा))06:05 – 07:44
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:44 – 09:22
- चर(सामान्य)09:22 – 11:01
- लाभ(शुभ)11:01 – 12:40
- अमृत(शुभ)12:40 – 14:18
- काल(वर्जित (परंपरा))14:18 – 15:57
- शुभ(शुभ)15:57 – 17:36
- रोग(वर्जित (परंपरा))17:36 – 19:14
रात
- काल(वर्जित (परंपरा))19:14 – 20:36
- लाभ(शुभ)20:36 – 21:57
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:57 – 23:18
- शुभ(शुभ)23:18 – 00:40 (14 जुल॰)
- अमृत(शुभ)00:40 (14 जुल॰) – 02:01 (14 जुल॰)
- चर(सामान्य)02:01 (14 जुल॰) – 03:23 (14 जुल॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))03:23 (14 जुल॰) – 04:44 (14 जुल॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))04:44 (14 जुल॰) – 06:05 (14 जुल॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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