पंचांग 17 सितंबर 1999

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

17 सितंबर 1999 · शुक्रवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:22
सूर्यास्त18:35
चंद्रोदय12:27
चंद्रास्त23:55
मास:
भाद्रपद (अमांत)
संवत:
शक 1921 · विक्रम (चैत्रादि) 2056
संवत्सर:
प्रमाथी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
सिंह
चंद्र राशि:
वृश्चिक 00:18 (18 सित॰) तक, फिर धनु

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शुक्रवार
तिथि
शुक्ल सप्तमी 12:22 तक, फिर शुक्ल अष्टमी 14:47 (18 सित॰) तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 00:18 (18 सित॰) तक, फिर मूल 03:09 (19 सित॰) तक
योग
प्रीति 16:58 तक, फिर आयुष्मान 17:51 (18 सित॰) तक
करण
वणिज 12:22 तक, फिर विष्टि 01:35 (18 सित॰) तक, फिर बव 14:47 (18 सित॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:04 – 12:53
  • राहु काल10:57 – 12:29
  • यमगंड15:32 – 17:04
  • गुलिक काल07:54 – 09:25

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • चर(सामान्य)06:22 – 07:54
  • लाभ(शुभ)07:54 – 09:25
  • अमृत(शुभ)09:25 – 10:57
  • काल(वर्जित (परंपरा))10:57 – 12:29
  • शुभ(शुभ)12:29 – 14:00
  • रोग(वर्जित (परंपरा))14:00 – 15:32
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:32 – 17:04
  • चर(सामान्य)17:04 – 18:35

रात

  • रोग(वर्जित (परंपरा))18:35 – 20:04
  • काल(वर्जित (परंपरा))20:04 – 21:32
  • लाभ(शुभ)21:32 – 23:00
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))23:00 – 00:29 (18 सित॰)
  • शुभ(शुभ)00:29 (18 सित॰) – 01:57 (18 सित॰)
  • अमृत(शुभ)01:57 (18 सित॰) – 03:25 (18 सित॰)
  • चर(सामान्य)03:25 (18 सित॰) – 04:54 (18 सित॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))04:54 (18 सित॰) – 06:22 (18 सित॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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