पंचांग 1 अक्टूबर 1999
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
1 अक्टूबर 1999 · शुक्रवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:24
सूर्यास्त18:23
चंद्रोदय23:38
चंद्रास्त12:05
- मास:
- भाद्रपद (अमांत) · आश्विन (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1921 · विक्रम (चैत्रादि) 2056
- संवत्सर:
- प्रमाथी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कन्या
- चंद्र राशि:
- वृषभ 08:37 तक, फिर मिथुन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शुक्रवार
- तिथि
- कृष्ण सप्तमी 22:32 तक, फिर कृष्ण अष्टमी 20:36 (2 अक्टू॰) तक
- नक्षत्र
- मृगशीर्ष 19:53 तक, फिर आर्द्रा 18:40 (2 अक्टू॰) तक
- योग
- व्यतीपात 13:23 तक, फिर वरीयान 10:35 (2 अक्टू॰) तक
- करण
- विष्टि 11:37 तक, फिर बव 22:32 तक, फिर बालव 09:31 (2 अक्टू॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:00 – 12:48
- राहु काल10:54 – 12:24
- यमगंड15:23 – 16:53
- गुलिक काल07:54 – 09:24
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- चर(सामान्य)06:24 – 07:54
- लाभ(शुभ)07:54 – 09:24
- अमृत(शुभ)09:24 – 10:54
- काल(वर्जित (परंपरा))10:54 – 12:24
- शुभ(शुभ)12:24 – 13:54
- रोग(वर्जित (परंपरा))13:54 – 15:23
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:23 – 16:53
- चर(सामान्य)16:53 – 18:23
रात
- रोग(वर्जित (परंपरा))18:23 – 19:53
- काल(वर्जित (परंपरा))19:53 – 21:24
- लाभ(शुभ)21:24 – 22:54
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))22:54 – 00:24 (2 अक्टू॰)
- शुभ(शुभ)00:24 (2 अक्टू॰) – 01:54 (2 अक्टू॰)
- अमृत(शुभ)01:54 (2 अक्टू॰) – 03:24 (2 अक्टू॰)
- चर(सामान्य)03:24 (2 अक्टू॰) – 04:54 (2 अक्टू॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))04:54 (2 अक्टू॰) – 06:25 (2 अक्टू॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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