पंचांग 9 अक्टूबर 1999
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
9 अक्टूबर 1999 · शनिवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:26
सूर्यास्त18:17
चंद्रोदयनहीं
चंद्रास्त18:28
- मास:
- भाद्रपद (अमांत) · आश्विन (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1921 · विक्रम (चैत्रादि) 2056
- संवत्सर:
- प्रमाथी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कन्या
- चंद्र राशि:
- कन्या
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शनिवार
- तिथि
- कृष्ण अमावस्या 17:04 तक, फिर शुक्ल प्रतिपदा 18:07 (10 अक्टू॰) तक
- नक्षत्र
- हस्त 19:50 तक, फिर चित्रा 21:31 (10 अक्टू॰) तक
- योग
- इन्द्र 22:13 तक, फिर वैधृति 22:01 (10 अक्टू॰) तक
- करण
- नाग 17:04 तक, फिर किंस्तुघ्न 05:32 (10 अक्टू॰) तक, फिर बव 18:07 (10 अक्टू॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:58 – 12:45
- राहु काल09:24 – 10:53
- यमगंड13:50 – 15:19
- गुलिक काल06:26 – 07:55
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- काल(वर्जित (परंपरा))06:26 – 07:55
- शुभ(शुभ)07:55 – 09:24
- रोग(वर्जित (परंपरा))09:24 – 10:53
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))10:53 – 12:21
- चर(सामान्य)12:21 – 13:50
- लाभ(शुभ)13:50 – 15:19
- अमृत(शुभ)15:19 – 16:48
- काल(वर्जित (परंपरा))16:48 – 18:17
रात
- लाभ(शुभ)18:17 – 19:48
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:48 – 21:19
- शुभ(शुभ)21:19 – 22:50
- अमृत(शुभ)22:50 – 00:21 (10 अक्टू॰)
- चर(सामान्य)00:21 (10 अक्टू॰) – 01:53 (10 अक्टू॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))01:53 (10 अक्टू॰) – 03:24 (10 अक्टू॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))03:24 (10 अक्टू॰) – 04:55 (10 अक्टू॰)
- लाभ(शुभ)04:55 (10 अक्टू॰) – 06:26 (10 अक्टू॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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