पंचांग 23 जनवरी 2001

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

23 जनवरी 2001 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:09
सूर्यास्त18:23
चंद्रोदय06:56 (24 जन॰)
चंद्रास्त17:27
मास:
पौष (अमांत) · माघ (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1922 · विक्रम (चैत्रादि) 2057
संवत्सर:
विक्रम (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मकर
चंद्र राशि:
धनु 20:44 तक, फिर मकर

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 15:54 तक, फिर कृष्ण अमावस्या 18:36 (24 जन॰) तक
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा 13:58 तक, फिर उत्तराषाढ़ा 17:05 (24 जन॰) तक
योग
हर्षण 14:50 तक, फिर वज्र 15:48 (24 जन॰) तक
करण
शकुनि 15:54 तक, फिर चतुष्पद 05:15 (24 जन॰) तक, फिर नाग 18:36 (24 जन॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:24 – 13:08
  • राहु काल15:34 – 16:59
  • यमगंड09:58 – 11:22
  • गुलिक काल12:46 – 14:10

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))07:09 – 08:33
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))08:33 – 09:58
  • चर(सामान्य)09:58 – 11:22
  • लाभ(शुभ)11:22 – 12:46
  • अमृत(शुभ)12:46 – 14:10
  • काल(वर्जित (परंपरा))14:10 – 15:34
  • शुभ(शुभ)15:34 – 16:59
  • रोग(वर्जित (परंपरा))16:59 – 18:23

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))18:23 – 19:58
  • लाभ(शुभ)19:58 – 21:34
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:34 – 23:10
  • शुभ(शुभ)23:10 – 00:46 (24 जन॰)
  • अमृत(शुभ)00:46 (24 जन॰) – 02:22 (24 जन॰)
  • चर(सामान्य)02:22 (24 जन॰) – 03:58 (24 जन॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:58 (24 जन॰) – 05:33 (24 जन॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))05:33 (24 जन॰) – 07:09 (24 जन॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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