पंचांग 1 सितंबर 2002

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

1 सितंबर 2002 · रविवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:19
सूर्यास्त18:49
चंद्रोदय01:12 (2 सित॰)
चंद्रास्त13:57
मास:
श्रावण (अमांत) · भाद्रपद (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1924 · विक्रम (चैत्रादि) 2059
संवत्सर:
चित्रभानु (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
सिंह
चंद्र राशि:
वृषभ 15:20 तक, फिर मिथुन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
रविवार
तिथि
कृष्ण नवमी 21:13 तक, फिर कृष्ण दशमी 20:58 (2 सित॰) तक
नक्षत्र
मृगशीर्ष 03:46 (2 सित॰) तक, फिर आर्द्रा 03:58 (3 सित॰) तक
योग
वज्र 00:12 (2 सित॰) तक, फिर सिद्धि 22:53 (2 सित॰) तक
करण
तैतिल 09:01 तक, फिर गर 21:13 तक, फिर वणिज 09:12 (2 सित॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:09 – 12:59
  • राहु काल17:15 – 18:49
  • यमगंड12:34 – 14:08
  • गुलिक काल15:41 – 17:15

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:19 – 07:53
  • चर(सामान्य)07:53 – 09:27
  • लाभ(शुभ)09:27 – 11:00
  • अमृत(शुभ)11:00 – 12:34
  • काल(वर्जित (परंपरा))12:34 – 14:08
  • शुभ(शुभ)14:08 – 15:41
  • रोग(वर्जित (परंपरा))15:41 – 17:15
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:15 – 18:49

रात

  • शुभ(शुभ)18:49 – 20:15
  • अमृत(शुभ)20:15 – 21:41
  • चर(सामान्य)21:41 – 23:08
  • रोग(वर्जित (परंपरा))23:08 – 00:34 (2 सित॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))00:34 (2 सित॰) – 02:00 (2 सित॰)
  • लाभ(शुभ)02:00 (2 सित॰) – 03:27 (2 सित॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:27 (2 सित॰) – 04:53 (2 सित॰)
  • शुभ(शुभ)04:53 (2 सित॰) – 06:20 (2 सित॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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