पंचांग 29 सितंबर 2002
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
29 सितंबर 2002 · रविवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:24
सूर्यास्त18:25
चंद्रोदय23:56
चंद्रास्त12:43
- मास:
- भाद्रपद (अमांत) · आश्विन (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1924 · विक्रम (चैत्रादि) 2059
- संवत्सर:
- चित्रभानु (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कन्या
- चंद्र राशि:
- मिथुन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- रविवार
- तिथि
- कृष्ण सप्तमी 10:17 तक, फिर कृष्ण अष्टमी 10:36 (30 सित॰) तक
- नक्षत्र
- मृगशीर्ष 11:35 तक, फिर आर्द्रा 12:29 (30 सित॰) तक
- योग
- व्यतीपात 07:59 तक, फिर वरीयान 07:14 (30 सित॰) तक
- करण
- बव 10:17 तक, फिर बालव 22:32 तक, फिर कौलव 10:36 (30 सित॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:00 – 12:48
- राहु काल16:55 – 18:25
- यमगंड12:24 – 13:54
- गुलिक काल15:24 – 16:55
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:24 – 07:54
- चर(सामान्य)07:54 – 09:24
- लाभ(शुभ)09:24 – 10:54
- अमृत(शुभ)10:54 – 12:24
- काल(वर्जित (परंपरा))12:24 – 13:54
- शुभ(शुभ)13:54 – 15:24
- रोग(वर्जित (परंपरा))15:24 – 16:55
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))16:55 – 18:25
रात
- शुभ(शुभ)18:25 – 19:55
- अमृत(शुभ)19:55 – 21:25
- चर(सामान्य)21:25 – 22:54
- रोग(वर्जित (परंपरा))22:54 – 00:24 (30 सित॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))00:24 (30 सित॰) – 01:54 (30 सित॰)
- लाभ(शुभ)01:54 (30 सित॰) – 03:24 (30 सित॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:24 (30 सित॰) – 04:54 (30 सित॰)
- शुभ(शुभ)04:54 (30 सित॰) – 06:24 (30 सित॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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