पंचांग 17 नवंबर 2002

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

17 नवंबर 2002 · रविवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:42
सूर्यास्त17:56
चंद्रोदय16:23
चंद्रास्त05:05 (18 नव॰)
मास:
कार्तिक (अमांत)
संवत:
शक 1924 · विक्रम (चैत्रादि) 2059
संवत्सर:
चित्रभानु (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
वृश्चिक
चंद्र राशि:
मीन 11:32 तक, फिर मेष

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
रविवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 02:36 (18 नव॰) तक, फिर शुक्ल चतुर्दशी 04:57 (19 नव॰) तक
नक्षत्र
रेवती 11:32 तक, फिर अश्विनी 14:27 (18 नव॰) तक
योग
सिद्धि 16:14 तक, फिर व्यतीपात 17:01 (18 नव॰) तक
करण
कौलव 13:20 तक, फिर तैतिल 02:36 (18 नव॰) तक, फिर गर 15:48 (18 नव॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त11:56 – 12:41
  • राहु काल16:32 – 17:56
  • यमगंड12:19 – 13:43
  • गुलिक काल15:08 – 16:32

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:42 – 08:06
  • चर(सामान्य)08:06 – 09:30
  • लाभ(शुभ)09:30 – 10:55
  • अमृत(शुभ)10:55 – 12:19
  • काल(वर्जित (परंपरा))12:19 – 13:43
  • शुभ(शुभ)13:43 – 15:08
  • रोग(वर्जित (परंपरा))15:08 – 16:32
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))16:32 – 17:56

रात

  • शुभ(शुभ)17:56 – 19:32
  • अमृत(शुभ)19:32 – 21:08
  • चर(सामान्य)21:08 – 22:43
  • रोग(वर्जित (परंपरा))22:43 – 00:19 (18 नव॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))00:19 (18 नव॰) – 01:55 (18 नव॰)
  • लाभ(शुभ)01:55 (18 नव॰) – 03:31 (18 नव॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:31 (18 नव॰) – 05:06 (18 नव॰)
  • शुभ(शुभ)05:06 (18 नव॰) – 06:42 (18 नव॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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