पंचांग 31 जनवरी 2003

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

31 जनवरी 2003 · शुक्रवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:08
सूर्यास्त18:27
चंद्रोदय07:06 (1 फ़र॰)
चंद्रास्त17:28
मास:
पौष (अमांत) · माघ (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1924 · विक्रम (चैत्रादि) 2059
संवत्सर:
चित्रभानु (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मकर
चंद्र राशि:
धनु 07:16 तक, फिर मकर

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शुक्रवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 16:42 तक, फिर कृष्ण अमावस्या 16:18 (1 फ़र॰) तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 01:16 (1 फ़र॰) तक, फिर श्रवण 01:38 (2 फ़र॰) तक
योग
वज्र 12:30 तक, फिर सिद्धि 10:54 (1 फ़र॰) तक
करण
शकुनि 16:42 तक, फिर चतुष्पद 04:27 (1 फ़र॰) तक, फिर नाग 16:18 (1 फ़र॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:25 – 13:10
  • राहु काल11:23 – 12:48
  • यमगंड15:37 – 17:02
  • गुलिक काल08:33 – 09:58

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • चर(सामान्य)07:08 – 08:33
  • लाभ(शुभ)08:33 – 09:58
  • अमृत(शुभ)09:58 – 11:23
  • काल(वर्जित (परंपरा))11:23 – 12:48
  • शुभ(शुभ)12:48 – 14:12
  • रोग(वर्जित (परंपरा))14:12 – 15:37
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:37 – 17:02
  • चर(सामान्य)17:02 – 18:27

रात

  • रोग(वर्जित (परंपरा))18:27 – 20:02
  • काल(वर्जित (परंपरा))20:02 – 21:37
  • लाभ(शुभ)21:37 – 23:12
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))23:12 – 00:47 (1 फ़र॰)
  • शुभ(शुभ)00:47 (1 फ़र॰) – 02:22 (1 फ़र॰)
  • अमृत(शुभ)02:22 (1 फ़र॰) – 03:58 (1 फ़र॰)
  • चर(सामान्य)03:58 (1 फ़र॰) – 05:33 (1 फ़र॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))05:33 (1 फ़र॰) – 07:08 (1 फ़र॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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