पंचांग 20 फ़रवरी 2003

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

20 फ़रवरी 2003 · गुरुवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:59
सूर्यास्त18:37
चंद्रोदय22:07
चंद्रास्त09:30
मास:
माघ (अमांत) · फाल्गुन (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1924 · विक्रम (चैत्रादि) 2059
संवत्सर:
चित्रभानु (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शिशिर · उत्तरायण
सूर्य राशि:
कुंभ
चंद्र राशि:
कन्या 01:32 (21 फ़र॰) तक, फिर तुला

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
गुरुवार
तिथि
कृष्ण चतुर्थी 18:13 तक, फिर कृष्ण पंचमी 15:34 (21 फ़र॰) तक
नक्षत्र
हस्त 14:33 तक, फिर चित्रा 12:35 (21 फ़र॰) तक
योग
शूल 13:24 तक, फिर गण्ड 10:00 (21 फ़र॰) तक
करण
बव 07:37 तक, फिर बालव 18:13 तक, फिर कौलव 04:51 (21 फ़र॰) तक, फिर तैतिल 15:34 (21 फ़र॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:25 – 13:11
  • राहु काल14:15 – 15:42
  • यमगंड06:59 – 08:27
  • गुलिक काल09:54 – 11:21

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • शुभ(शुभ)06:59 – 08:27
  • रोग(वर्जित (परंपरा))08:27 – 09:54
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:54 – 11:21
  • चर(सामान्य)11:21 – 12:48
  • लाभ(शुभ)12:48 – 14:15
  • अमृत(शुभ)14:15 – 15:42
  • काल(वर्जित (परंपरा))15:42 – 17:09
  • शुभ(शुभ)17:09 – 18:37

रात

  • अमृत(शुभ)18:37 – 20:09
  • चर(सामान्य)20:09 – 21:42
  • रोग(वर्जित (परंपरा))21:42 – 23:15
  • काल(वर्जित (परंपरा))23:15 – 00:48 (21 फ़र॰)
  • लाभ(शुभ)00:48 (21 फ़र॰) – 02:20 (21 फ़र॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))02:20 (21 फ़र॰) – 03:53 (21 फ़र॰)
  • शुभ(शुभ)03:53 (21 फ़र॰) – 05:26 (21 फ़र॰)
  • अमृत(शुभ)05:26 (21 फ़र॰) – 06:59 (21 फ़र॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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