पंचांग 21 सितंबर 2003
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
21 सितंबर 2003 · रविवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:23
सूर्यास्त18:32
चंद्रोदय02:28 (22 सित॰)
चंद्रास्त15:14
- मास:
- भाद्रपद (अमांत) · आश्विन (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1925 · विक्रम (चैत्रादि) 2060
- संवत्सर:
- सुभानु (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कन्या
- चंद्र राशि:
- मिथुन 08:04 तक, फिर कर्क
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- रविवार
- तिथि
- कृष्ण दशमी 15:51 तक, फिर कृष्ण एकादशी 15:48 (22 सित॰) तक
- नक्षत्र
- पुनर्वसु 14:22 तक, फिर पुष्य 15:01 (22 सित॰) तक
- योग
- परिघ 00:40 (22 सित॰) तक, फिर शिव 23:20 (22 सित॰) तक
- करण
- विष्टि 15:51 तक, फिर बव 03:55 (22 सित॰) तक, फिर बालव 15:48 (22 सित॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:03 – 12:51
- राहु काल17:01 – 18:32
- यमगंड12:27 – 13:58
- गुलिक काल15:29 – 17:01
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:23 – 07:54
- चर(सामान्य)07:54 – 09:25
- लाभ(शुभ)09:25 – 10:56
- अमृत(शुभ)10:56 – 12:27
- काल(वर्जित (परंपरा))12:27 – 13:58
- शुभ(शुभ)13:58 – 15:29
- रोग(वर्जित (परंपरा))15:29 – 17:01
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:01 – 18:32
रात
- शुभ(शुभ)18:32 – 20:01
- अमृत(शुभ)20:01 – 21:30
- चर(सामान्य)21:30 – 22:58
- रोग(वर्जित (परंपरा))22:58 – 00:27 (22 सित॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))00:27 (22 सित॰) – 01:56 (22 सित॰)
- लाभ(शुभ)01:56 (22 सित॰) – 03:25 (22 सित॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:25 (22 सित॰) – 04:54 (22 सित॰)
- शुभ(शुभ)04:54 (22 सित॰) – 06:23 (22 सित॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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