पंचांग 4 जुलाई 2004
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
4 जुलाई 2004 · रविवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:02
सूर्यास्त19:15
चंद्रोदय21:25
चंद्रास्त07:47
- मास:
- आषाढ़ (अमांत) · श्रावण (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1926 · विक्रम (चैत्रादि) 2061
- संवत्सर:
- तारण (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- ग्रीष्म · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मिथुन
- चंद्र राशि:
- मकर
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- रविवार
- तिथि
- कृष्ण द्वितीया 09:17 तक, फिर कृष्ण तृतीया 06:10 (5 जुल॰) तक
- नक्षत्र
- श्रवण 02:44 (5 जुल॰) तक, फिर धनिष्ठा 00:55 (6 जुल॰) तक
- योग
- वैधृति 07:30 तक, फिर विष्कम्भ 03:50 (5 जुल॰) तक, फिर प्रीति 00:39 (6 जुल॰) तक
- करण
- गर 09:17 तक, फिर वणिज 19:39 तक, फिर विष्टि 06:10 (5 जुल॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:12 – 13:05
- राहु काल17:36 – 19:15
- यमगंड12:38 – 14:18
- गुलिक काल15:57 – 17:36
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:02 – 07:41
- चर(सामान्य)07:41 – 09:20
- लाभ(शुभ)09:20 – 10:59
- अमृत(शुभ)10:59 – 12:38
- काल(वर्जित (परंपरा))12:38 – 14:18
- शुभ(शुभ)14:18 – 15:57
- रोग(वर्जित (परंपरा))15:57 – 17:36
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:36 – 19:15
रात
- शुभ(शुभ)19:15 – 20:36
- अमृत(शुभ)20:36 – 21:57
- चर(सामान्य)21:57 – 23:18
- रोग(वर्जित (परंपरा))23:18 – 00:39 (5 जुल॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))00:39 (5 जुल॰) – 02:00 (5 जुल॰)
- लाभ(शुभ)02:00 (5 जुल॰) – 03:21 (5 जुल॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:21 (5 जुल॰) – 04:41 (5 जुल॰)
- शुभ(शुभ)04:41 (5 जुल॰) – 06:02 (5 जुल॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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