पंचांग 30 जुलाई 2004
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
30 जुलाई 2004 · शुक्रवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:11
सूर्यास्त19:10
चंद्रोदय18:11
चंद्रास्त05:23 (31 जुल॰)
- मास:
- अधिक श्रावण (अमांत)
- संवत:
- शक 1926 · विक्रम (चैत्रादि) 2061
- संवत्सर:
- तारण (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कर्क
- चंद्र राशि:
- धनु 23:41 तक, फिर मकर
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शुक्रवार
- तिथि
- शुक्ल त्रयोदशी 06:37 तक, फिर शुक्ल चतुर्दशी 03:03 (31 जुल॰) तक, फिर शुक्ल पूर्णिमा 23:35 (31 जुल॰) तक
- नक्षत्र
- पूर्वाषाढ़ा 18:22 तक, फिर उत्तराषाढ़ा 15:40 (31 जुल॰) तक
- योग
- विष्कम्भ 22:43 तक, फिर प्रीति 18:46 (31 जुल॰) तक
- करण
- तैतिल 06:37 तक, फिर गर 16:50 तक, फिर वणिज 03:03 (31 जुल॰) तक, फिर विष्टि 13:18 (31 जुल॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:14 – 13:06
- राहु काल11:03 – 12:40
- यमगंड15:55 – 17:32
- गुलिक काल07:48 – 09:26
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- चर(सामान्य)06:11 – 07:48
- लाभ(शुभ)07:48 – 09:26
- अमृत(शुभ)09:26 – 11:03
- काल(वर्जित (परंपरा))11:03 – 12:40
- शुभ(शुभ)12:40 – 14:18
- रोग(वर्जित (परंपरा))14:18 – 15:55
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:55 – 17:32
- चर(सामान्य)17:32 – 19:10
रात
- रोग(वर्जित (परंपरा))19:10 – 20:32
- काल(वर्जित (परंपरा))20:32 – 21:55
- लाभ(शुभ)21:55 – 23:18
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))23:18 – 00:41 (31 जुल॰)
- शुभ(शुभ)00:41 (31 जुल॰) – 02:03 (31 जुल॰)
- अमृत(शुभ)02:03 (31 जुल॰) – 03:26 (31 जुल॰)
- चर(सामान्य)03:26 (31 जुल॰) – 04:49 (31 जुल॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))04:49 (31 जुल॰) – 06:11 (31 जुल॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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