पंचांग 7 सितंबर 2004

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

7 सितंबर 2004 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:20
सूर्यास्त18:43
चंद्रोदय00:37 (8 सित॰)
चंद्रास्त13:33
मास:
श्रावण (अमांत) · भाद्रपद (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1926 · विक्रम (चैत्रादि) 2061
संवत्सर:
तारण (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
सिंह
चंद्र राशि:
वृषभ 16:01 तक, फिर मिथुन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 09:52 तक, फिर कृष्ण नवमी 12:20 (8 सित॰) तक
नक्षत्र
मृगशीर्ष 05:31 (8 सित॰) तक, फिर आर्द्रा 08:28 (9 सित॰) तक
योग
वज्र 13:45 तक, फिर सिद्धि 14:42 (8 सित॰) तक
करण
कौलव 09:52 तक, फिर तैतिल 23:06 तक, फिर गर 12:20 (8 सित॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:07 – 12:57
  • राहु काल15:38 – 17:10
  • यमगंड09:26 – 10:59
  • गुलिक काल12:32 – 14:05

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))06:20 – 07:53
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:53 – 09:26
  • चर(सामान्य)09:26 – 10:59
  • लाभ(शुभ)10:59 – 12:32
  • अमृत(शुभ)12:32 – 14:05
  • काल(वर्जित (परंपरा))14:05 – 15:38
  • शुभ(शुभ)15:38 – 17:10
  • रोग(वर्जित (परंपरा))17:10 – 18:43

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))18:43 – 20:10
  • लाभ(शुभ)20:10 – 21:38
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:38 – 23:05
  • शुभ(शुभ)23:05 – 00:32 (8 सित॰)
  • अमृत(शुभ)00:32 (8 सित॰) – 01:59 (8 सित॰)
  • चर(सामान्य)01:59 (8 सित॰) – 03:26 (8 सित॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:26 (8 सित॰) – 04:53 (8 सित॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))04:53 (8 सित॰) – 06:21 (8 सित॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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