पंचांग 10 जनवरी 2005

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

10 जनवरी 2005 · सोमवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:09
सूर्यास्त18:15
चंद्रोदयनहीं
चंद्रास्त18:07
मास:
मार्गशीर्ष (अमांत) · पौष (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1927 · विक्रम (चैत्रादि) 2062
संवत्सर:
पार्थिव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
धनु
चंद्र राशि:
धनु 23:07 तक, फिर मकर

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
सोमवार
तिथि
कृष्ण अमावस्या 17:32 तक, फिर शुक्ल प्रतिपदा 13:38 (11 जन॰) तक
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा 17:55 तक, फिर उत्तराषाढ़ा 14:46 (11 जन॰) तक
योग
व्याघात 18:15 तक, फिर हर्षण 13:47 (11 जन॰) तक
करण
चतुष्पद 07:31 तक, फिर नाग 17:32 तक, फिर किंस्तुघ्न 03:34 (11 जन॰) तक, फिर बव 13:38 (11 जन॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:19 – 13:04
  • राहु काल08:32 – 09:55
  • यमगंड11:18 – 12:42
  • गुलिक काल14:05 – 15:28

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • अमृत(शुभ)07:09 – 08:32
  • काल(वर्जित (परंपरा))08:32 – 09:55
  • शुभ(शुभ)09:55 – 11:18
  • रोग(वर्जित (परंपरा))11:18 – 12:42
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:42 – 14:05
  • चर(सामान्य)14:05 – 15:28
  • लाभ(शुभ)15:28 – 16:51
  • अमृत(शुभ)16:51 – 18:15

रात

  • चर(सामान्य)18:15 – 19:51
  • रोग(वर्जित (परंपरा))19:51 – 21:28
  • काल(वर्जित (परंपरा))21:28 – 23:05
  • लाभ(शुभ)23:05 – 00:42 (11 जन॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:42 (11 जन॰) – 02:19 (11 जन॰)
  • शुभ(शुभ)02:19 (11 जन॰) – 03:55 (11 जन॰)
  • अमृत(शुभ)03:55 (11 जन॰) – 05:32 (11 जन॰)
  • चर(सामान्य)05:32 (11 जन॰) – 07:09 (11 जन॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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