पंचांग 30 अगस्त 2005
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
30 अगस्त 2005 · मंगलवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:19
सूर्यास्त18:50
चंद्रोदय03:13 (31 अग॰)
चंद्रास्त16:07
- मास:
- श्रावण (अमांत) · भाद्रपद (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1927 · विक्रम (चैत्रादि) 2062
- संवत्सर:
- पार्थिव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- सिंह
- चंद्र राशि:
- मिथुन 00:28 (31 अग॰) तक, फिर कर्क
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- मंगलवार
- तिथि
- कृष्ण एकादशी 14:42 तक, फिर कृष्ण द्वादशी 17:06 (31 अग॰) तक
- नक्षत्र
- पुनर्वसु 07:12 (31 अग॰) तक
- योग
- व्यतीपात 06:17 (31 अग॰) तक, फिर वरीयान 07:15 (1 सित॰) तक
- करण
- बालव 14:42 तक, फिर कौलव 03:53 (31 अग॰) तक, फिर तैतिल 17:06 (31 अग॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:10 – 13:00
- राहु काल15:42 – 17:16
- यमगंड09:27 – 11:01
- गुलिक काल12:35 – 14:08
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- रोग(वर्जित (परंपरा))06:19 – 07:53
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:53 – 09:27
- चर(सामान्य)09:27 – 11:01
- लाभ(शुभ)11:01 – 12:35
- अमृत(शुभ)12:35 – 14:08
- काल(वर्जित (परंपरा))14:08 – 15:42
- शुभ(शुभ)15:42 – 17:16
- रोग(वर्जित (परंपरा))17:16 – 18:50
रात
- काल(वर्जित (परंपरा))18:50 – 20:16
- लाभ(शुभ)20:16 – 21:42
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:42 – 23:09
- शुभ(शुभ)23:09 – 00:35 (31 अग॰)
- अमृत(शुभ)00:35 (31 अग॰) – 02:01 (31 अग॰)
- चर(सामान्य)02:01 (31 अग॰) – 03:27 (31 अग॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))03:27 (31 अग॰) – 04:53 (31 अग॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))04:53 (31 अग॰) – 06:19 (31 अग॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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