पंचांग 14 सितंबर 2005

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

14 सितंबर 2005 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:22
सूर्यास्त18:37
चंद्रोदय15:54
चंद्रास्त03:11 (15 सित॰)
मास:
भाद्रपद (अमांत)
संवत:
शक 1927 · विक्रम (चैत्रादि) 2062
संवत्सर:
पार्थिव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
सिंह
चंद्र राशि:
मकर

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
शुक्ल एकादशी 20:54 तक, फिर शुक्ल द्वादशी 17:39 (15 सित॰) तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 20:57 तक, फिर श्रवण 18:29 (15 सित॰) तक
योग
शोभन 18:57 तक, फिर अतिगण्ड 15:12 (15 सित॰) तक
करण
वणिज 10:25 तक, फिर विष्टि 20:54 तक, फिर बव 07:18 (15 सित॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:05 – 12:54परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:30 – 14:01
  • यमगंड07:54 – 09:26
  • गुलिक काल10:58 – 12:30

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)06:22 – 07:54
  • अमृत(शुभ)07:54 – 09:26
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:26 – 10:58
  • शुभ(शुभ)10:58 – 12:30
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:30 – 14:01
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:01 – 15:33
  • चर(सामान्य)15:33 – 17:05
  • लाभ(शुभ)17:05 – 18:37

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:37 – 20:05
  • शुभ(शुभ)20:05 – 21:34
  • अमृत(शुभ)21:34 – 23:02
  • चर(सामान्य)23:02 – 00:30 (15 सित॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:30 (15 सित॰) – 01:58 (15 सित॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))01:58 (15 सित॰) – 03:26 (15 सित॰)
  • लाभ(शुभ)03:26 (15 सित॰) – 04:54 (15 सित॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:54 (15 सित॰) – 06:22 (15 सित॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

अपनी कुंडली देखें