पंचांग 25 सितंबर 2005

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

25 सितंबर 2005 · रविवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:23
सूर्यास्त18:28
चंद्रोदय00:12 (26 सित॰)
चंद्रास्त13:12
मास:
भाद्रपद (अमांत) · आश्विन (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1927 · विक्रम (चैत्रादि) 2062
संवत्सर:
पार्थिव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कन्या
चंद्र राशि:
मिथुन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
रविवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 01:04 (26 सित॰) तक, फिर कृष्ण नवमी 03:11 (27 सित॰) तक
नक्षत्र
मृगशीर्ष 08:51 तक, फिर आर्द्रा 11:14 (26 सित॰) तक
योग
व्यतीपात 12:04 तक, फिर वरीयान 12:31 (26 सित॰) तक
करण
बालव 12:10 तक, फिर कौलव 01:04 (26 सित॰) तक, फिर तैतिल 14:04 (26 सित॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:01 – 12:50
  • राहु काल16:57 – 18:28
  • यमगंड12:26 – 13:56
  • गुलिक काल15:27 – 16:57

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:23 – 07:54
  • चर(सामान्य)07:54 – 09:25
  • लाभ(शुभ)09:25 – 10:55
  • अमृत(शुभ)10:55 – 12:26
  • काल(वर्जित (परंपरा))12:26 – 13:56
  • शुभ(शुभ)13:56 – 15:27
  • रोग(वर्जित (परंपरा))15:27 – 16:57
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))16:57 – 18:28

रात

  • शुभ(शुभ)18:28 – 19:57
  • अमृत(शुभ)19:57 – 21:27
  • चर(सामान्य)21:27 – 22:56
  • रोग(वर्जित (परंपरा))22:56 – 00:26 (26 सित॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))00:26 (26 सित॰) – 01:55 (26 सित॰)
  • लाभ(शुभ)01:55 (26 सित॰) – 03:25 (26 सित॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:25 (26 सित॰) – 04:54 (26 सित॰)
  • शुभ(शुभ)04:54 (26 सित॰) – 06:24 (26 सित॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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