पंचांग 25 दिसंबर 2005

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

25 दिसंबर 2005 · रविवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:03
सूर्यास्त18:05
चंद्रोदय02:12 (26 दिस॰)
चंद्रास्त13:20
मास:
मार्गशीर्ष (अमांत) · पौष (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1927 · विक्रम (चैत्रादि) 2062
संवत्सर:
पार्थिव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
धनु
चंद्र राशि:
कन्या 20:00 तक, फिर तुला

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
रविवार
तिथि
कृष्ण नवमी 15:44 तक, फिर कृष्ण दशमी 16:32 (26 दिस॰) तक
नक्षत्र
हस्त 07:06 तक, फिर चित्रा 08:42 (26 दिस॰) तक
योग
शोभन 14:08 तक, फिर अतिगण्ड 13:39 (26 दिस॰) तक
करण
गर 15:44 तक, फिर वणिज 04:14 (26 दिस॰) तक, फिर विष्टि 16:32 (26 दिस॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:12 – 12:56
  • राहु काल16:42 – 18:05
  • यमगंड12:34 – 13:57
  • गुलिक काल15:19 – 16:42

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:03 – 08:26
  • चर(सामान्य)08:26 – 09:49
  • लाभ(शुभ)09:49 – 11:11
  • अमृत(शुभ)11:11 – 12:34
  • काल(वर्जित (परंपरा))12:34 – 13:57
  • शुभ(शुभ)13:57 – 15:19
  • रोग(वर्जित (परंपरा))15:19 – 16:42
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))16:42 – 18:05

रात

  • शुभ(शुभ)18:05 – 19:42
  • अमृत(शुभ)19:42 – 21:20
  • चर(सामान्य)21:20 – 22:57
  • रोग(वर्जित (परंपरा))22:57 – 00:34 (26 दिस॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))00:34 (26 दिस॰) – 02:12 (26 दिस॰)
  • लाभ(शुभ)02:12 (26 दिस॰) – 03:49 (26 दिस॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:49 (26 दिस॰) – 05:27 (26 दिस॰)
  • शुभ(शुभ)05:27 (26 दिस॰) – 07:04 (26 दिस॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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