पंचांग 31 दिसंबर 2005
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
31 दिसंबर 2005 · शनिवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय07:06
सूर्यास्त18:08
चंद्रोदय07:17
चंद्रास्त18:23
- मास:
- मार्गशीर्ष (अमांत) · पौष (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1927 · विक्रम (चैत्रादि) 2062
- संवत्सर:
- पार्थिव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- हेमंत · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- धनु
- चंद्र राशि:
- धनु
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शनिवार
- तिथि
- कृष्ण अमावस्या 08:41 तक, फिर शुक्ल प्रतिपदा 05:32 (1 जन॰) तक, फिर शुक्ल द्वितीया 02:16 (2 जन॰) तक
- नक्षत्र
- पूर्वाषाढ़ा 02:37 (1 जन॰) तक, फिर उत्तराषाढ़ा 00:04 (2 जन॰) तक
- योग
- ध्रुव 22:03 तक, फिर व्याघात 18:09 (1 जन॰) तक
- करण
- नाग 08:41 तक, फिर किंस्तुघ्न 19:09 तक, फिर बव 05:32 (1 जन॰) तक, फिर बालव 15:54 (1 जन॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:15 – 12:59
- राहु काल09:51 – 11:14
- यमगंड14:00 – 15:23
- गुलिक काल07:06 – 08:29
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- काल(वर्जित (परंपरा))07:06 – 08:29
- शुभ(शुभ)08:29 – 09:51
- रोग(वर्जित (परंपरा))09:51 – 11:14
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))11:14 – 12:37
- चर(सामान्य)12:37 – 14:00
- लाभ(शुभ)14:00 – 15:23
- अमृत(शुभ)15:23 – 16:45
- काल(वर्जित (परंपरा))16:45 – 18:08
रात
- लाभ(शुभ)18:08 – 19:45
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:45 – 21:23
- शुभ(शुभ)21:23 – 23:00
- अमृत(शुभ)23:00 – 00:37 (1 जन॰)
- चर(सामान्य)00:37 (1 जन॰) – 02:15 (1 जन॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))02:15 (1 जन॰) – 03:52 (1 जन॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))03:52 (1 जन॰) – 05:29 (1 जन॰)
- लाभ(शुभ)05:29 (1 जन॰) – 07:06 (1 जन॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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