पंचांग 3 जनवरी 2006
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
3 जनवरी 2006 · मंगलवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय07:07
सूर्यास्त18:10
चंद्रोदय10:01
चंद्रास्त21:43
- मास:
- पौष (अमांत)
- संवत:
- शक 1927 · विक्रम (चैत्रादि) 2062
- संवत्सर:
- पार्थिव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- हेमंत · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- धनु
- चंद्र राशि:
- मकर 08:21 तक, फिर कुंभ
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- मंगलवार
- तिथि
- शुक्ल चतुर्थी 19:59 तक, फिर शुक्ल पंचमी 17:15 (4 जन॰) तक
- नक्षत्र
- धनिष्ठा 19:13 तक, फिर शतभिषा 17:12 (4 जन॰) तक
- योग
- वज्र 10:25 तक, फिर सिद्धि 06:49 (4 जन॰) तक, फिर व्यतीपात 03:32 (5 जन॰) तक
- करण
- वणिज 09:28 तक, फिर विष्टि 19:59 तक, फिर बव 06:34 (4 जन॰) तक, फिर बालव 17:15 (4 जन॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:16 – 13:01
- राहु काल15:24 – 16:47
- यमगंड09:53 – 11:16
- गुलिक काल12:38 – 14:01
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- रोग(वर्जित (परंपरा))07:07 – 08:30
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))08:30 – 09:53
- चर(सामान्य)09:53 – 11:16
- लाभ(शुभ)11:16 – 12:38
- अमृत(शुभ)12:38 – 14:01
- काल(वर्जित (परंपरा))14:01 – 15:24
- शुभ(शुभ)15:24 – 16:47
- रोग(वर्जित (परंपरा))16:47 – 18:10
रात
- काल(वर्जित (परंपरा))18:10 – 19:47
- लाभ(शुभ)19:47 – 21:24
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:24 – 23:01
- शुभ(शुभ)23:01 – 00:39 (4 जन॰)
- अमृत(शुभ)00:39 (4 जन॰) – 02:16 (4 जन॰)
- चर(सामान्य)02:16 (4 जन॰) – 03:53 (4 जन॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))03:53 (4 जन॰) – 05:30 (4 जन॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))05:30 (4 जन॰) – 07:07 (4 जन॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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