पंचांग 19 अप्रैल 2006
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
19 अप्रैल 2006 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:15
सूर्यास्त18:52
चंद्रोदय00:20 (20 अप्रैल)
चंद्रास्त10:22
- मास:
- चैत्र (अमांत) · वैशाख (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1928 · विक्रम (चैत्रादि) 2063
- संवत्सर:
- व्यय (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वसंत · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मेष
- चंद्र राशि:
- धनु
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- कृष्ण षष्ठी 23:12 तक, फिर कृष्ण सप्तमी 21:49 (20 अप्रैल) तक
- नक्षत्र
- मूल 15:42 तक, फिर पूर्वाषाढ़ा 15:09 (20 अप्रैल) तक
- योग
- परिघ 06:56 तक, फिर शिव 04:59 (20 अप्रैल) तक, फिर सिद्ध 02:40 (21 अप्रैल) तक
- करण
- गर 11:45 तक, फिर वणिज 23:12 तक, फिर विष्टि 10:34 (20 अप्रैल) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:08 – 12:59परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:33 – 14:08
- यमगंड07:49 – 09:24
- गुलिक काल10:59 – 12:33
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:15 – 07:49
- अमृत(शुभ)07:49 – 09:24
- काल(वर्जित (परंपरा))09:24 – 10:59
- शुभ(शुभ)10:59 – 12:33
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:33 – 14:08
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:08 – 15:43
- चर(सामान्य)15:43 – 17:17
- लाभ(शुभ)17:17 – 18:52
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:52 – 20:17
- शुभ(शुभ)20:17 – 21:43
- अमृत(शुभ)21:43 – 23:08
- चर(सामान्य)23:08 – 00:33 (20 अप्रैल)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:33 (20 अप्रैल) – 01:58 (20 अप्रैल)
- काल(वर्जित (परंपरा))01:58 (20 अप्रैल) – 03:24 (20 अप्रैल)
- लाभ(शुभ)03:24 (20 अप्रैल) – 04:49 (20 अप्रैल)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:49 (20 अप्रैल) – 06:14 (20 अप्रैल)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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