पंचांग 7 अक्टूबर 2006
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
7 अक्टूबर 2006 · शनिवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:26
सूर्यास्त18:18
चंद्रोदय18:27
चंद्रास्तनहीं
- मास:
- आश्विन (अमांत)
- संवत:
- शक 1928 · विक्रम (चैत्रादि) 2063
- संवत्सर:
- व्यय (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कन्या
- चंद्र राशि:
- मीन 00:55 (8 अक्टू॰) तक, फिर मेष
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शनिवार
- तिथि
- शुक्ल पूर्णिमा 08:42 तक, फिर कृष्ण प्रतिपदा 05:04 (8 अक्टू॰) तक, फिर कृष्ण द्वितीया 01:41 (9 अक्टू॰) तक
- नक्षत्र
- रेवती 00:55 (8 अक्टू॰) तक, फिर अश्विनी 22:16 (8 अक्टू॰) तक
- योग
- ध्रुव 09:24 तक, फिर व्याघात 05:15 (8 अक्टू॰) तक, फिर हर्षण 01:19 (9 अक्टू॰) तक
- करण
- बव 08:42 तक, फिर बालव 18:52 तक, फिर कौलव 05:04 (8 अक्टू॰) तक, फिर तैतिल 15:20 (8 अक्टू॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:58 – 12:46
- राहु काल09:24 – 10:53
- यमगंड13:51 – 15:20
- गुलिक काल06:26 – 07:55
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- काल(वर्जित (परंपरा))06:26 – 07:55
- शुभ(शुभ)07:55 – 09:24
- रोग(वर्जित (परंपरा))09:24 – 10:53
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))10:53 – 12:22
- चर(सामान्य)12:22 – 13:51
- लाभ(शुभ)13:51 – 15:20
- अमृत(शुभ)15:20 – 16:49
- काल(वर्जित (परंपरा))16:49 – 18:18
रात
- लाभ(शुभ)18:18 – 19:49
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:49 – 21:20
- शुभ(शुभ)21:20 – 22:51
- अमृत(शुभ)22:51 – 00:22 (8 अक्टू॰)
- चर(सामान्य)00:22 (8 अक्टू॰) – 01:53 (8 अक्टू॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))01:53 (8 अक्टू॰) – 03:24 (8 अक्टू॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))03:24 (8 अक्टू॰) – 04:55 (8 अक्टू॰)
- लाभ(शुभ)04:55 (8 अक्टू॰) – 06:26 (8 अक्टू॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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