पंचांग 14 जनवरी 2007
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
14 जनवरी 2007 · रविवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय07:09
सूर्यास्त18:17
चंद्रोदय03:31 (15 जन॰)
चंद्रास्त13:51
- मास:
- पौष (अमांत) · माघ (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1928 · विक्रम (चैत्रादि) 2063
- संवत्सर:
- व्यय (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- हेमंत · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- धनु
- चंद्र राशि:
- तुला 12:02 तक, फिर वृश्चिक
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- रविवार
- तिथि
- कृष्ण दशमी 11:29 तक, फिर कृष्ण एकादशी 12:29 (15 जन॰) तक
- नक्षत्र
- विशाखा 18:28 तक, फिर अनुराधा 19:48 (15 जन॰) तक
- योग
- शूल 12:30 तक, फिर गण्ड 12:05 (15 जन॰) तक
- करण
- विष्टि 11:29 तक, फिर बव 00:05 (15 जन॰) तक, फिर बालव 12:29 (15 जन॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:21 – 13:05
- राहु काल16:53 – 18:17
- यमगंड12:43 – 14:06
- गुलिक काल15:30 – 16:53
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:09 – 08:33
- चर(सामान्य)08:33 – 09:56
- लाभ(शुभ)09:56 – 11:20
- अमृत(शुभ)11:20 – 12:43
- काल(वर्जित (परंपरा))12:43 – 14:06
- शुभ(शुभ)14:06 – 15:30
- रोग(वर्जित (परंपरा))15:30 – 16:53
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))16:53 – 18:17
रात
- शुभ(शुभ)18:17 – 19:53
- अमृत(शुभ)19:53 – 21:30
- चर(सामान्य)21:30 – 23:06
- रोग(वर्जित (परंपरा))23:06 – 00:43 (15 जन॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))00:43 (15 जन॰) – 02:20 (15 जन॰)
- लाभ(शुभ)02:20 (15 जन॰) – 03:56 (15 जन॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:56 (15 जन॰) – 05:33 (15 जन॰)
- शुभ(शुभ)05:33 (15 जन॰) – 07:09 (15 जन॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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