पंचांग 20 जनवरी 2007
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
20 जनवरी 2007 · शनिवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय07:09
सूर्यास्त18:21
चंद्रोदय08:08
चंद्रास्त19:39
- मास:
- माघ (अमांत)
- संवत:
- शक 1928 · विक्रम (चैत्रादि) 2063
- संवत्सर:
- व्यय (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शिशिर · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मकर
- चंद्र राशि:
- मकर 04:12 (21 जन॰) तक, फिर कुंभ
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शनिवार
- तिथि
- शुक्ल प्रतिपदा 07:28 तक, फिर शुक्ल द्वितीया 05:10 (21 जन॰) तक, फिर शुक्ल तृतीया 02:44 (22 जन॰) तक
- नक्षत्र
- श्रवण 17:01 तक, फिर धनिष्ठा 15:20 (21 जन॰) तक
- योग
- सिद्धि 23:11 तक, फिर व्यतीपात 20:00 (21 जन॰) तक
- करण
- बव 07:28 तक, फिर बालव 18:20 तक, फिर कौलव 05:10 (21 जन॰) तक, फिर तैतिल 15:58 (21 जन॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:23 – 13:07
- राहु काल09:57 – 11:21
- यमगंड14:09 – 15:33
- गुलिक काल07:09 – 08:33
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- काल(वर्जित (परंपरा))07:09 – 08:33
- शुभ(शुभ)08:33 – 09:57
- रोग(वर्जित (परंपरा))09:57 – 11:21
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))11:21 – 12:45
- चर(सामान्य)12:45 – 14:09
- लाभ(शुभ)14:09 – 15:33
- अमृत(शुभ)15:33 – 16:57
- काल(वर्जित (परंपरा))16:57 – 18:21
रात
- लाभ(शुभ)18:21 – 19:57
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:57 – 21:33
- शुभ(शुभ)21:33 – 23:09
- अमृत(शुभ)23:09 – 00:45 (21 जन॰)
- चर(सामान्य)00:45 (21 जन॰) – 02:21 (21 जन॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))02:21 (21 जन॰) – 03:57 (21 जन॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))03:57 (21 जन॰) – 05:33 (21 जन॰)
- लाभ(शुभ)05:33 (21 जन॰) – 07:09 (21 जन॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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