पंचांग 13 मार्च 2007

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

13 मार्च 2007 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:44
सूर्यास्त18:43
चंद्रोदय02:51 (14 मार्च)
चंद्रास्त12:56
मास:
फाल्गुन (अमांत) · चैत्र (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1928 · विक्रम (चैत्रादि) 2063
संवत्सर:
व्यय (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शिशिर · उत्तरायण
सूर्य राशि:
कुंभ
चंद्र राशि:
धनु

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
कृष्ण नवमी 21:54 तक, फिर कृष्ण दशमी 21:15 (14 मार्च) तक
नक्षत्र
मूल 15:38 तक, फिर पूर्वाषाढ़ा 15:49 (14 मार्च) तक
योग
व्यतीपात 23:53 तक, फिर वरीयान 22:10 (14 मार्च) तक
करण
तैतिल 09:55 तक, फिर गर 21:54 तक, फिर वणिज 09:40 (14 मार्च) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:20 – 13:08
  • राहु काल15:44 – 17:13
  • यमगंड09:44 – 11:14
  • गुलिक काल12:44 – 14:14

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))06:44 – 08:14
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))08:14 – 09:44
  • चर(सामान्य)09:44 – 11:14
  • लाभ(शुभ)11:14 – 12:44
  • अमृत(शुभ)12:44 – 14:14
  • काल(वर्जित (परंपरा))14:14 – 15:44
  • शुभ(शुभ)15:44 – 17:13
  • रोग(वर्जित (परंपरा))17:13 – 18:43

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))18:43 – 20:13
  • लाभ(शुभ)20:13 – 21:43
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:43 – 23:13
  • शुभ(शुभ)23:13 – 00:43 (14 मार्च)
  • अमृत(शुभ)00:43 (14 मार्च) – 02:13 (14 मार्च)
  • चर(सामान्य)02:13 (14 मार्च) – 03:44 (14 मार्च)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:44 (14 मार्च) – 05:14 (14 मार्च)
  • काल(वर्जित (परंपरा))05:14 (14 मार्च) – 06:44 (14 मार्च)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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