पंचांग 18 अप्रैल 2007

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

18 अप्रैल 2007 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:16
सूर्यास्त18:52
चंद्रोदय06:36
चंद्रास्त19:58
मास:
वैशाख (अमांत)
संवत:
शक 1929 · विक्रम (चैत्रादि) 2064
संवत्सर:
सर्वजित (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वसंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मेष
चंद्र राशि:
मेष

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
शुक्ल प्रतिपदा 13:17 तक, फिर शुक्ल द्वितीया 09:40 (19 अप्रैल) तक
नक्षत्र
अश्विनी 09:10 तक, फिर भरणी 06:17 (19 अप्रैल) तक
योग
प्रीति 23:21 तक, फिर आयुष्मान 19:23 (19 अप्रैल) तक
करण
बव 13:17 तक, फिर बालव 23:27 तक, फिर कौलव 09:40 (19 अप्रैल) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:08 – 12:59परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:34 – 14:08
  • यमगंड07:50 – 09:25
  • गुलिक काल10:59 – 12:34

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)06:16 – 07:50
  • अमृत(शुभ)07:50 – 09:25
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:25 – 10:59
  • शुभ(शुभ)10:59 – 12:34
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:34 – 14:08
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:08 – 15:43
  • चर(सामान्य)15:43 – 17:17
  • लाभ(शुभ)17:17 – 18:52

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:52 – 20:17
  • शुभ(शुभ)20:17 – 21:43
  • अमृत(शुभ)21:43 – 23:08
  • चर(सामान्य)23:08 – 00:33 (19 अप्रैल)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:33 (19 अप्रैल) – 01:59 (19 अप्रैल)
  • काल(वर्जित (परंपरा))01:59 (19 अप्रैल) – 03:24 (19 अप्रैल)
  • लाभ(शुभ)03:24 (19 अप्रैल) – 04:49 (19 अप्रैल)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:49 (19 अप्रैल) – 06:15 (19 अप्रैल)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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