पंचांग 13 मई 2007
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
13 मई 2007 · रविवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:01
सूर्यास्त19:00
चंद्रोदय03:41 (14 मई)
चंद्रास्त15:29
- मास:
- वैशाख (अमांत) · ज्येष्ठ (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1929 · विक्रम (चैत्रादि) 2064
- संवत्सर:
- सर्वजित (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वसंत · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मेष
- चंद्र राशि:
- मीन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- रविवार
- तिथि
- कृष्ण एकादशी 14:47 तक, फिर कृष्ण द्वादशी 11:38 (14 मई) तक
- नक्षत्र
- उत्तरभाद्रपदा 01:11 (14 मई) तक, फिर रेवती 22:40 (14 मई) तक
- योग
- विष्कम्भ 22:04 तक, फिर प्रीति 18:17 (14 मई) तक
- करण
- बालव 14:47 तक, फिर कौलव 01:15 (14 मई) तक, फिर तैतिल 11:38 (14 मई) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:05 – 12:56
- राहु काल17:22 – 19:00
- यमगंड12:30 – 14:08
- गुलिक काल15:45 – 17:22
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:01 – 07:39
- चर(सामान्य)07:39 – 09:16
- लाभ(शुभ)09:16 – 10:53
- अमृत(शुभ)10:53 – 12:30
- काल(वर्जित (परंपरा))12:30 – 14:08
- शुभ(शुभ)14:08 – 15:45
- रोग(वर्जित (परंपरा))15:45 – 17:22
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:22 – 19:00
रात
- शुभ(शुभ)19:00 – 20:22
- अमृत(शुभ)20:22 – 21:45
- चर(सामान्य)21:45 – 23:08
- रोग(वर्जित (परंपरा))23:08 – 00:30 (14 मई)
- काल(वर्जित (परंपरा))00:30 (14 मई) – 01:53 (14 मई)
- लाभ(शुभ)01:53 (14 मई) – 03:16 (14 मई)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:16 (14 मई) – 04:38 (14 मई)
- शुभ(शुभ)04:38 (14 मई) – 06:01 (14 मई)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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