पंचांग 18 मई 2007
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
18 मई 2007 · शुक्रवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:00
सूर्यास्त19:02
चंद्रोदय07:02
चंद्रास्त20:58
- मास:
- अधिक ज्येष्ठ (अमांत)
- संवत:
- शक 1929 · विक्रम (चैत्रादि) 2064
- संवत्सर:
- सर्वजित (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- ग्रीष्म · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- वृषभ
- चंद्र राशि:
- वृषभ 23:02 तक, फिर मिथुन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शुक्रवार
- तिथि
- शुक्ल द्वितीया 18:31 तक, फिर शुक्ल तृतीया 16:01 (19 मई) तक
- नक्षत्र
- रोहिणी 12:03 तक, फिर मृगशीर्ष 10:11 (19 मई) तक
- योग
- सुकर्मा 22:52 तक, फिर धृति 19:52 (19 मई) तक
- करण
- बालव 07:58 तक, फिर कौलव 18:31 तक, फिर तैतिल 05:11 (19 मई) तक, फिर गर 16:01 (19 मई) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:04 – 12:57
- राहु काल10:53 – 12:31
- यमगंड15:46 – 17:24
- गुलिक काल07:37 – 09:15
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- चर(सामान्य)06:00 – 07:37
- लाभ(शुभ)07:37 – 09:15
- अमृत(शुभ)09:15 – 10:53
- काल(वर्जित (परंपरा))10:53 – 12:31
- शुभ(शुभ)12:31 – 14:08
- रोग(वर्जित (परंपरा))14:08 – 15:46
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:46 – 17:24
- चर(सामान्य)17:24 – 19:02
रात
- रोग(वर्जित (परंपरा))19:02 – 20:24
- काल(वर्जित (परंपरा))20:24 – 21:46
- लाभ(शुभ)21:46 – 23:08
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))23:08 – 00:30 (19 मई)
- शुभ(शुभ)00:30 (19 मई) – 01:53 (19 मई)
- अमृत(शुभ)01:53 (19 मई) – 03:15 (19 मई)
- चर(सामान्य)03:15 (19 मई) – 04:37 (19 मई)
- रोग(वर्जित (परंपरा))04:37 (19 मई) – 05:59 (19 मई)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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