पंचांग 4 जून 2007

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

4 जून 2007 · सोमवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय05:57
सूर्यास्त19:08
चंद्रोदय22:15
चंद्रास्त08:32
मास:
अधिक ज्येष्ठ (अमांत) · आषाढ़ (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1929 · विक्रम (चैत्रादि) 2064
संवत्सर:
सर्वजित (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
ग्रीष्म · उत्तरायण
सूर्य राशि:
वृषभ
चंद्र राशि:
धनु 17:36 तक, फिर मकर

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
सोमवार
तिथि
कृष्ण तृतीया 08:41 तक, फिर कृष्ण चतुर्थी 08:37 (5 जून) तक
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा 11:26 तक, फिर उत्तराषाढ़ा 12:01 (5 जून) तक
योग
शुक्ल 18:23 तक, फिर ब्रह्म 17:12 (5 जून) तक
करण
विष्टि 08:41 तक, फिर बव 20:42 तक, फिर बालव 08:37 (5 जून) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:06 – 12:59
  • राहु काल07:36 – 09:15
  • यमगंड10:53 – 12:32
  • गुलिक काल14:11 – 15:50

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • अमृत(शुभ)05:57 – 07:36
  • काल(वर्जित (परंपरा))07:36 – 09:15
  • शुभ(शुभ)09:15 – 10:53
  • रोग(वर्जित (परंपरा))10:53 – 12:32
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:32 – 14:11
  • चर(सामान्य)14:11 – 15:50
  • लाभ(शुभ)15:50 – 17:29
  • अमृत(शुभ)17:29 – 19:08

रात

  • चर(सामान्य)19:08 – 20:29
  • रोग(वर्जित (परंपरा))20:29 – 21:50
  • काल(वर्जित (परंपरा))21:50 – 23:11
  • लाभ(शुभ)23:11 – 00:32 (5 जून)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:32 (5 जून) – 01:53 (5 जून)
  • शुभ(शुभ)01:53 (5 जून) – 03:15 (5 जून)
  • अमृत(शुभ)03:15 (5 जून) – 04:36 (5 जून)
  • चर(सामान्य)04:36 (5 जून) – 05:57 (5 जून)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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