पंचांग 16 जून 2007
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
16 जून 2007 · शनिवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय05:58
सूर्यास्त19:12
चंद्रोदय06:49
चंद्रास्त20:41
- मास:
- ज्येष्ठ (अमांत)
- संवत:
- शक 1929 · विक्रम (चैत्रादि) 2064
- संवत्सर:
- सर्वजित (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- ग्रीष्म · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मिथुन
- चंद्र राशि:
- मिथुन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शनिवार
- तिथि
- शुक्ल प्रतिपदा 06:14 तक, फिर शुक्ल द्वितीया 04:18 (17 जून) तक, फिर शुक्ल तृतीया 03:03 (18 जून) तक
- नक्षत्र
- आर्द्रा 18:54 तक, फिर पुनर्वसु 18:07 (17 जून) तक
- योग
- गण्ड 06:32 तक, फिर वृद्धि 03:56 (17 जून) तक, फिर ध्रुव 01:51 (18 जून) तक
- करण
- बव 06:14 तक, फिर बालव 17:12 तक, फिर कौलव 04:18 (17 जून) तक, फिर तैतिल 15:35 (17 जून) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:08 – 13:01
- राहु काल09:16 – 10:55
- यमगंड14:14 – 15:53
- गुलिक काल05:58 – 07:37
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- काल(वर्जित (परंपरा))05:58 – 07:37
- शुभ(शुभ)07:37 – 09:16
- रोग(वर्जित (परंपरा))09:16 – 10:55
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))10:55 – 12:35
- चर(सामान्य)12:35 – 14:14
- लाभ(शुभ)14:14 – 15:53
- अमृत(शुभ)15:53 – 17:33
- काल(वर्जित (परंपरा))17:33 – 19:12
रात
- लाभ(शुभ)19:12 – 20:33
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))20:33 – 21:53
- शुभ(शुभ)21:53 – 23:14
- अमृत(शुभ)23:14 – 00:35 (17 जून)
- चर(सामान्य)00:35 (17 जून) – 01:55 (17 जून)
- रोग(वर्जित (परंपरा))01:55 (17 जून) – 03:16 (17 जून)
- काल(वर्जित (परंपरा))03:16 (17 जून) – 04:37 (17 जून)
- लाभ(शुभ)04:37 (17 जून) – 05:58 (17 जून)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
अपनी कुंडली देखें