पंचांग 3 जुलाई 2007
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
3 जुलाई 2007 · मंगलवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:02
सूर्यास्त19:15
चंद्रोदय21:42
चंद्रास्त08:24
- मास:
- ज्येष्ठ (अमांत) · आषाढ़ (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1929 · विक्रम (चैत्रादि) 2064
- संवत्सर:
- सर्वजित (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- ग्रीष्म · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मिथुन
- चंद्र राशि:
- मकर 05:43 (4 जुल॰) तक, फिर कुंभ
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- मंगलवार
- तिथि
- कृष्ण तृतीया 17:45 तक, फिर कृष्ण चतुर्थी 16:34 (4 जुल॰) तक
- नक्षत्र
- श्रवण 17:55 तक, फिर धनिष्ठा 17:28 (4 जुल॰) तक
- योग
- विष्कम्भ 22:28 तक, फिर प्रीति 20:26 (4 जुल॰) तक
- करण
- वणिज 06:14 तक, फिर विष्टि 17:45 तक, फिर बव 05:12 (4 जुल॰) तक, फिर बालव 16:34 (4 जुल॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:12 – 13:05
- राहु काल15:56 – 17:36
- यमगंड09:20 – 10:59
- गुलिक काल12:38 – 14:17
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- रोग(वर्जित (परंपरा))06:02 – 07:41
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:41 – 09:20
- चर(सामान्य)09:20 – 10:59
- लाभ(शुभ)10:59 – 12:38
- अमृत(शुभ)12:38 – 14:17
- काल(वर्जित (परंपरा))14:17 – 15:56
- शुभ(शुभ)15:56 – 17:36
- रोग(वर्जित (परंपरा))17:36 – 19:15
रात
- काल(वर्जित (परंपरा))19:15 – 20:36
- लाभ(शुभ)20:36 – 21:57
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:57 – 23:17
- शुभ(शुभ)23:17 – 00:38 (4 जुल॰)
- अमृत(शुभ)00:38 (4 जुल॰) – 01:59 (4 जुल॰)
- चर(सामान्य)01:59 (4 जुल॰) – 03:20 (4 जुल॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))03:20 (4 जुल॰) – 04:41 (4 जुल॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))04:41 (4 जुल॰) – 06:02 (4 जुल॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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