पंचांग 13 जुलाई 2007
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
13 जुलाई 2007 · शुक्रवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:05
सूर्यास्त19:14
चंद्रोदय05:36 (14 जुल॰)
चंद्रास्त18:27
- मास:
- ज्येष्ठ (अमांत) · आषाढ़ (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1929 · विक्रम (चैत्रादि) 2064
- संवत्सर:
- सर्वजित (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- ग्रीष्म · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मिथुन
- चंद्र राशि:
- मिथुन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शुक्रवार
- तिथि
- कृष्ण चतुर्दशी 19:12 तक, फिर कृष्ण अमावस्या 17:33 (14 जुल॰) तक
- नक्षत्र
- आर्द्रा 04:06 (14 जुल॰) तक, फिर पुनर्वसु 03:26 (15 जुल॰) तक
- योग
- ध्रुव 16:30 तक, फिर व्याघात 14:05 (14 जुल॰) तक
- करण
- विष्टि 08:11 तक, फिर शकुनि 19:12 तक, फिर चतुष्पद 06:19 (14 जुल॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:13 – 13:06
- राहु काल11:01 – 12:40
- यमगंड15:57 – 17:36
- गुलिक काल07:44 – 09:22
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- चर(सामान्य)06:05 – 07:44
- लाभ(शुभ)07:44 – 09:22
- अमृत(शुभ)09:22 – 11:01
- काल(वर्जित (परंपरा))11:01 – 12:40
- शुभ(शुभ)12:40 – 14:18
- रोग(वर्जित (परंपरा))14:18 – 15:57
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:57 – 17:36
- चर(सामान्य)17:36 – 19:14
रात
- रोग(वर्जित (परंपरा))19:14 – 20:36
- काल(वर्जित (परंपरा))20:36 – 21:57
- लाभ(शुभ)21:57 – 23:19
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))23:19 – 00:40 (14 जुल॰)
- शुभ(शुभ)00:40 (14 जुल॰) – 02:01 (14 जुल॰)
- अमृत(शुभ)02:01 (14 जुल॰) – 03:23 (14 जुल॰)
- चर(सामान्य)03:23 (14 जुल॰) – 04:44 (14 जुल॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))04:44 (14 जुल॰) – 06:05 (14 जुल॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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