पंचांग 24 जुलाई 2007

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

24 जुलाई 2007 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:09
सूर्यास्त19:12
चंद्रोदय14:23
चंद्रास्त01:34 (25 जुल॰)
मास:
आषाढ़ (अमांत)
संवत:
शक 1929 · विक्रम (चैत्रादि) 2064
संवत्सर:
सर्वजित (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
ग्रीष्म · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कर्क
चंद्र राशि:
तुला 14:01 तक, फिर वृश्चिक

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
शुक्ल दशमी 05:21 (25 जुल॰) तक, फिर शुक्ल एकादशी 06:44 (26 जुल॰) तक
नक्षत्र
विशाखा 20:38 तक, फिर अनुराधा 22:50 (25 जुल॰) तक
योग
शुभ 13:09 तक, फिर शुक्ल 13:35 (25 जुल॰) तक
करण
तैतिल 16:27 तक, फिर गर 05:21 (25 जुल॰) तक, फिर वणिज 18:07 (25 जुल॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:14 – 13:07
  • राहु काल15:56 – 17:34
  • यमगंड09:25 – 11:03
  • गुलिक काल12:40 – 14:18

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))06:09 – 07:47
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:47 – 09:25
  • चर(सामान्य)09:25 – 11:03
  • लाभ(शुभ)11:03 – 12:40
  • अमृत(शुभ)12:40 – 14:18
  • काल(वर्जित (परंपरा))14:18 – 15:56
  • शुभ(शुभ)15:56 – 17:34
  • रोग(वर्जित (परंपरा))17:34 – 19:12

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))19:12 – 20:34
  • लाभ(शुभ)20:34 – 21:56
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:56 – 23:19
  • शुभ(शुभ)23:19 – 00:41 (25 जुल॰)
  • अमृत(शुभ)00:41 (25 जुल॰) – 02:03 (25 जुल॰)
  • चर(सामान्य)02:03 (25 जुल॰) – 03:25 (25 जुल॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:25 (25 जुल॰) – 04:47 (25 जुल॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))04:47 (25 जुल॰) – 06:09 (25 जुल॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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