पंचांग 10 अगस्त 2007

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

10 अगस्त 2007 · शुक्रवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:14
सूर्यास्त19:05
चंद्रोदय04:27 (11 अग॰)
चंद्रास्त17:14
मास:
आषाढ़ (अमांत) · श्रावण (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1929 · विक्रम (चैत्रादि) 2064
संवत्सर:
सर्वजित (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
ग्रीष्म · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कर्क
चंद्र राशि:
मिथुन 05:21 (11 अग॰) तक, फिर कर्क

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शुक्रवार
तिथि
कृष्ण द्वादशी 06:26 तक, फिर कृष्ण त्रयोदशी 05:22 (11 अग॰) तक, फिर कृष्ण चतुर्दशी 04:42 (12 अग॰) तक
नक्षत्र
आर्द्रा 11:35 तक, फिर पुनर्वसु 11:20 (11 अग॰) तक
योग
वज्र 22:41 तक, फिर सिद्धि 21:01 (11 अग॰) तक
करण
तैतिल 06:26 तक, फिर गर 17:51 तक, फिर वणिज 05:22 (11 अग॰) तक, फिर विष्टि 16:58 (11 अग॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:14 – 13:05
  • राहु काल11:03 – 12:39
  • यमगंड15:52 – 17:28
  • गुलिक काल07:51 – 09:27

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • चर(सामान्य)06:14 – 07:51
  • लाभ(शुभ)07:51 – 09:27
  • अमृत(शुभ)09:27 – 11:03
  • काल(वर्जित (परंपरा))11:03 – 12:39
  • शुभ(शुभ)12:39 – 14:16
  • रोग(वर्जित (परंपरा))14:16 – 15:52
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:52 – 17:28
  • चर(सामान्य)17:28 – 19:05

रात

  • रोग(वर्जित (परंपरा))19:05 – 20:28
  • काल(वर्जित (परंपरा))20:28 – 21:52
  • लाभ(शुभ)21:52 – 23:16
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))23:16 – 00:40 (11 अग॰)
  • शुभ(शुभ)00:40 (11 अग॰) – 02:03 (11 अग॰)
  • अमृत(शुभ)02:03 (11 अग॰) – 03:27 (11 अग॰)
  • चर(सामान्य)03:27 (11 अग॰) – 04:51 (11 अग॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))04:51 (11 अग॰) – 06:15 (11 अग॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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