पंचांग 10 सितंबर 2007

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

10 सितंबर 2007 · सोमवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:21
सूर्यास्त18:41
चंद्रोदय06:00 (11 सित॰)
चंद्रास्त18:01
मास:
श्रावण (अमांत) · भाद्रपद (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1929 · विक्रम (चैत्रादि) 2064
संवत्सर:
सर्वजित (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
सिंह
चंद्र राशि:
सिंह

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
सोमवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 16:59 तक, फिर कृष्ण अमावस्या 18:14 (11 सित॰) तक
नक्षत्र
मघा 20:40 तक, फिर पूर्वाफाल्गुनी 22:35 (11 सित॰) तक
योग
सिद्ध 02:13 (11 सित॰) तक, फिर साध्य 02:18 (12 सित॰) तक
करण
शकुनि 16:59 तक, फिर चतुष्पद 05:33 (11 सित॰) तक, फिर नाग 18:14 (11 सित॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:06 – 12:56
  • राहु काल07:53 – 09:26
  • यमगंड10:59 – 12:31
  • गुलिक काल14:04 – 15:36

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • अमृत(शुभ)06:21 – 07:53
  • काल(वर्जित (परंपरा))07:53 – 09:26
  • शुभ(शुभ)09:26 – 10:59
  • रोग(वर्जित (परंपरा))10:59 – 12:31
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:31 – 14:04
  • चर(सामान्य)14:04 – 15:36
  • लाभ(शुभ)15:36 – 17:09
  • अमृत(शुभ)17:09 – 18:41

रात

  • चर(सामान्य)18:41 – 20:09
  • रोग(वर्जित (परंपरा))20:09 – 21:36
  • काल(वर्जित (परंपरा))21:36 – 23:04
  • लाभ(शुभ)23:04 – 00:31 (11 सित॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:31 (11 सित॰) – 01:59 (11 सित॰)
  • शुभ(शुभ)01:59 (11 सित॰) – 03:26 (11 सित॰)
  • अमृत(शुभ)03:26 (11 सित॰) – 04:54 (11 सित॰)
  • चर(सामान्य)04:54 (11 सित॰) – 06:21 (11 सित॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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