पंचांग 2 अक्टूबर 2007
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
2 अक्टूबर 2007 · मंगलवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:25
सूर्यास्त18:22
चंद्रोदय23:11
चंद्रास्त12:05
- मास:
- भाद्रपद (अमांत) · आश्विन (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1929 · विक्रम (चैत्रादि) 2064
- संवत्सर:
- सर्वजित (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कन्या
- चंद्र राशि:
- वृषभ 12:05 तक, फिर मिथुन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- मंगलवार
- तिथि
- कृष्ण सप्तमी 04:16 (3 अक्टू॰) तक, फिर कृष्ण अष्टमी 03:05 (4 अक्टू॰) तक
- नक्षत्र
- मृगशीर्ष 23:32 तक, फिर आर्द्रा 22:56 (3 अक्टू॰) तक
- योग
- व्यतीपात 15:11 तक, फिर वरीयान 12:47 (3 अक्टू॰) तक
- करण
- विष्टि 17:06 तक, फिर बव 04:16 (3 अक्टू॰) तक, फिर बालव 15:35 (3 अक्टू॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:00 – 12:47
- राहु काल15:23 – 16:53
- यमगंड09:24 – 10:54
- गुलिक काल12:23 – 13:53
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- रोग(वर्जित (परंपरा))06:25 – 07:54
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:54 – 09:24
- चर(सामान्य)09:24 – 10:54
- लाभ(शुभ)10:54 – 12:23
- अमृत(शुभ)12:23 – 13:53
- काल(वर्जित (परंपरा))13:53 – 15:23
- शुभ(शुभ)15:23 – 16:53
- रोग(वर्जित (परंपरा))16:53 – 18:22
रात
- काल(वर्जित (परंपरा))18:22 – 19:53
- लाभ(शुभ)19:53 – 21:23
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:23 – 22:53
- शुभ(शुभ)22:53 – 00:24 (3 अक्टू॰)
- अमृत(शुभ)00:24 (3 अक्टू॰) – 01:54 (3 अक्टू॰)
- चर(सामान्य)01:54 (3 अक्टू॰) – 03:24 (3 अक्टू॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))03:24 (3 अक्टू॰) – 04:55 (3 अक्टू॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))04:55 (3 अक्टू॰) – 06:25 (3 अक्टू॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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