पंचांग 26 अक्टूबर 2007
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
26 अक्टूबर 2007 · शुक्रवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:31
सूर्यास्त18:05
चंद्रोदय18:05
चंद्रास्तनहीं
- मास:
- आश्विन (अमांत)
- संवत:
- शक 1929 · विक्रम (चैत्रादि) 2064
- संवत्सर:
- सर्वजित (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- तुला
- चंद्र राशि:
- मेष
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शुक्रवार
- तिथि
- शुक्ल पूर्णिमा 10:21 तक, फिर कृष्ण प्रतिपदा 06:26 (27 अक्टू॰) तक, फिर कृष्ण द्वितीया 02:37 (28 अक्टू॰) तक
- नक्षत्र
- अश्विनी 18:02 तक, फिर भरणी 14:55 (27 अक्टू॰) तक
- योग
- वज्र 14:59 तक, फिर सिद्धि 10:35 (27 अक्टू॰) तक
- करण
- बव 10:21 तक, फिर बालव 20:24 तक, फिर कौलव 06:26 (27 अक्टू॰) तक, फिर तैतिल 16:30 (27 अक्टू॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:55 – 12:41
- राहु काल10:51 – 12:18
- यमगंड15:11 – 16:38
- गुलिक काल07:58 – 09:25
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- चर(सामान्य)06:31 – 07:58
- लाभ(शुभ)07:58 – 09:25
- अमृत(शुभ)09:25 – 10:51
- काल(वर्जित (परंपरा))10:51 – 12:18
- शुभ(शुभ)12:18 – 13:45
- रोग(वर्जित (परंपरा))13:45 – 15:11
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:11 – 16:38
- चर(सामान्य)16:38 – 18:05
रात
- रोग(वर्जित (परंपरा))18:05 – 19:38
- काल(वर्जित (परंपरा))19:38 – 21:11
- लाभ(शुभ)21:11 – 22:45
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))22:45 – 00:18 (27 अक्टू॰)
- शुभ(शुभ)00:18 (27 अक्टू॰) – 01:52 (27 अक्टू॰)
- अमृत(शुभ)01:52 (27 अक्टू॰) – 03:25 (27 अक्टू॰)
- चर(सामान्य)03:25 (27 अक्टू॰) – 04:58 (27 अक्टू॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))04:58 (27 अक्टू॰) – 06:32 (27 अक्टू॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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