पंचांग 20 दिसंबर 2007

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

20 दिसंबर 2007 · गुरुवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:01
सूर्यास्त18:02
चंद्रोदय14:27
चंद्रास्त03:51 (21 दिस॰)
मास:
मार्गशीर्ष (अमांत)
संवत:
शक 1929 · विक्रम (चैत्रादि) 2064
संवत्सर:
सर्वजित (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
धनु
चंद्र राशि:
मेष

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
गुरुवार
तिथि
शुक्ल एकादशी 20:01 तक, फिर शुक्ल द्वादशी 16:50 (21 दिस॰) तक
नक्षत्र
अश्विनी 15:07 तक, फिर भरणी 12:42 (21 दिस॰) तक
योग
परिघ 08:46 तक, फिर शिव 05:05 (21 दिस॰) तक, फिर सिद्ध 01:09 (22 दिस॰) तक
करण
वणिज 09:30 तक, फिर विष्टि 20:01 तक, फिर बव 06:28 (21 दिस॰) तक, फिर बालव 16:50 (21 दिस॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:09 – 12:53
  • राहु काल13:54 – 15:17
  • यमगंड07:01 – 08:23
  • गुलिक काल09:46 – 11:09

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • शुभ(शुभ)07:01 – 08:23
  • रोग(वर्जित (परंपरा))08:23 – 09:46
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:46 – 11:09
  • चर(सामान्य)11:09 – 12:31
  • लाभ(शुभ)12:31 – 13:54
  • अमृत(शुभ)13:54 – 15:17
  • काल(वर्जित (परंपरा))15:17 – 16:39
  • शुभ(शुभ)16:39 – 18:02

रात

  • अमृत(शुभ)18:02 – 19:39
  • चर(सामान्य)19:39 – 21:17
  • रोग(वर्जित (परंपरा))21:17 – 22:54
  • काल(वर्जित (परंपरा))22:54 – 00:32 (21 दिस॰)
  • लाभ(शुभ)00:32 (21 दिस॰) – 02:09 (21 दिस॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))02:09 (21 दिस॰) – 03:46 (21 दिस॰)
  • शुभ(शुभ)03:46 (21 दिस॰) – 05:24 (21 दिस॰)
  • अमृत(शुभ)05:24 (21 दिस॰) – 07:01 (21 दिस॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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