पंचांग 5 मार्च 2008

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

5 मार्च 2008 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:50
सूर्यास्त18:41
चंद्रोदय05:43 (6 मार्च)
चंद्रास्त16:34
मास:
माघ (अमांत) · फाल्गुन (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1929 · विक्रम (चैत्रादि) 2064
संवत्सर:
सर्वजित (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शिशिर · उत्तरायण
सूर्य राशि:
कुंभ
चंद्र राशि:
मकर 05:42 (6 मार्च) तक, फिर कुंभ

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 01:31 (6 मार्च) तक, फिर कृष्ण चतुर्दशी 00:25 (7 मार्च) तक
नक्षत्र
श्रवण 17:44 तक, फिर धनिष्ठा 17:30 (6 मार्च) तक
योग
परिघ 15:30 तक, फिर शिव 13:41 (6 मार्च) तक
करण
गर 13:49 तक, फिर वणिज 01:31 (6 मार्च) तक, फिर विष्टि 13:02 (6 मार्च) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:22 – 13:09परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:46 – 14:15
  • यमगंड08:19 – 09:48
  • गुलिक काल11:17 – 12:46

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)06:50 – 08:19
  • अमृत(शुभ)08:19 – 09:48
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:48 – 11:17
  • शुभ(शुभ)11:17 – 12:46
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:46 – 14:15
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:15 – 15:43
  • चर(सामान्य)15:43 – 17:12
  • लाभ(शुभ)17:12 – 18:41

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:41 – 20:12
  • शुभ(शुभ)20:12 – 21:43
  • अमृत(शुभ)21:43 – 23:14
  • चर(सामान्य)23:14 – 00:45 (6 मार्च)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:45 (6 मार्च) – 02:16 (6 मार्च)
  • काल(वर्जित (परंपरा))02:16 (6 मार्च) – 03:47 (6 मार्च)
  • लाभ(शुभ)03:47 (6 मार्च) – 05:18 (6 मार्च)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:18 (6 मार्च) – 06:49 (6 मार्च)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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