पंचांग 30 जून 2008
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
30 जून 2008 · सोमवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:01
सूर्यास्त19:15
चंद्रोदय03:44 (1 जुल॰)
चंद्रास्त16:29
- मास:
- ज्येष्ठ (अमांत) · आषाढ़ (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1930 · विक्रम (चैत्रादि) 2065
- संवत्सर:
- सर्वधारी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- ग्रीष्म · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मिथुन
- चंद्र राशि:
- वृषभ
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- सोमवार
- तिथि
- कृष्ण द्वादशी 18:31 तक, फिर कृष्ण त्रयोदशी 14:58 (1 जुल॰) तक
- नक्षत्र
- कृत्तिका 19:56 तक, फिर रोहिणी 17:12 (1 जुल॰) तक
- योग
- धृति 07:04 तक, फिर शूल 03:11 (1 जुल॰) तक, फिर गण्ड 23:09 (1 जुल॰) तक
- करण
- कौलव 08:13 तक, फिर तैतिल 18:31 तक, फिर गर 04:46 (1 जुल॰) तक, फिर वणिज 14:58 (1 जुल॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:11 – 13:04
- राहु काल07:40 – 09:19
- यमगंड10:59 – 12:38
- गुलिक काल14:17 – 15:56
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- अमृत(शुभ)06:01 – 07:40
- काल(वर्जित (परंपरा))07:40 – 09:19
- शुभ(शुभ)09:19 – 10:59
- रोग(वर्जित (परंपरा))10:59 – 12:38
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:38 – 14:17
- चर(सामान्य)14:17 – 15:56
- लाभ(शुभ)15:56 – 17:35
- अमृत(शुभ)17:35 – 19:15
रात
- चर(सामान्य)19:15 – 20:35
- रोग(वर्जित (परंपरा))20:35 – 21:56
- काल(वर्जित (परंपरा))21:56 – 23:17
- लाभ(शुभ)23:17 – 00:38 (1 जुल॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:38 (1 जुल॰) – 01:59 (1 जुल॰)
- शुभ(शुभ)01:59 (1 जुल॰) – 03:20 (1 जुल॰)
- अमृत(शुभ)03:20 (1 जुल॰) – 04:40 (1 जुल॰)
- चर(सामान्य)04:40 (1 जुल॰) – 06:01 (1 जुल॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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