पंचांग 23 अगस्त 2008

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

23 अगस्त 2008 · शनिवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:18
सूर्यास्त18:55
चंद्रोदय23:26
चंद्रास्त12:07
मास:
श्रावण (अमांत) · भाद्रपद (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1930 · विक्रम (चैत्रादि) 2065
संवत्सर:
सर्वधारी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
सिंह
चंद्र राशि:
मेष 17:06 तक, फिर वृषभ

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शनिवार
तिथि
कृष्ण सप्तमी 18:25 तक, फिर कृष्ण अष्टमी 16:11 (24 अग॰) तक
नक्षत्र
भरणी 11:27 तक, फिर कृत्तिका 10:01 (24 अग॰) तक
योग
ध्रुव 22:18 तक, फिर व्याघात 19:23 (24 अग॰) तक
करण
विष्टि 07:29 तक, फिर बव 18:25 तक, फिर बालव 05:19 (24 अग॰) तक, फिर कौलव 16:11 (24 अग॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:11 – 13:02
  • राहु काल09:27 – 11:02
  • यमगंड14:11 – 15:46
  • गुलिक काल06:18 – 07:52

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • काल(वर्जित (परंपरा))06:18 – 07:52
  • शुभ(शुभ)07:52 – 09:27
  • रोग(वर्जित (परंपरा))09:27 – 11:02
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))11:02 – 12:36
  • चर(सामान्य)12:36 – 14:11
  • लाभ(शुभ)14:11 – 15:46
  • अमृत(शुभ)15:46 – 17:21
  • काल(वर्जित (परंपरा))17:21 – 18:55

रात

  • लाभ(शुभ)18:55 – 20:21
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))20:21 – 21:46
  • शुभ(शुभ)21:46 – 23:11
  • अमृत(शुभ)23:11 – 00:37 (24 अग॰)
  • चर(सामान्य)00:37 (24 अग॰) – 02:02 (24 अग॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))02:02 (24 अग॰) – 03:27 (24 अग॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))03:27 (24 अग॰) – 04:53 (24 अग॰)
  • लाभ(शुभ)04:53 (24 अग॰) – 06:18 (24 अग॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

अपनी कुंडली देखें