पंचांग 31 अगस्त 2008
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
31 अगस्त 2008 · रविवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:19
सूर्यास्त18:49
चंद्रोदय06:34
चंद्रास्त19:07
- मास:
- भाद्रपद (अमांत)
- संवत:
- शक 1930 · विक्रम (चैत्रादि) 2065
- संवत्सर:
- सर्वधारी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- सिंह
- चंद्र राशि:
- सिंह 06:18 (1 सित॰) तक, फिर कन्या
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- रविवार
- तिथि
- शुक्ल प्रतिपदा 00:27 (1 सित॰) तक, फिर शुक्ल द्वितीया 23:58 (1 सित॰) तक
- नक्षत्र
- पूर्वाफाल्गुनी 00:18 (1 सित॰) तक, फिर उत्तराफाल्गुनी 00:32 (2 सित॰) तक
- योग
- सिद्ध 21:57 तक, फिर साध्य 20:27 (1 सित॰) तक
- करण
- किंस्तुघ्न 12:53 तक, फिर बव 00:27 (1 सित॰) तक, फिर बालव 12:08 (1 सित॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:09 – 12:59
- राहु काल17:15 – 18:49
- यमगंड12:34 – 14:08
- गुलिक काल15:42 – 17:15
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:19 – 07:53
- चर(सामान्य)07:53 – 09:27
- लाभ(शुभ)09:27 – 11:00
- अमृत(शुभ)11:00 – 12:34
- काल(वर्जित (परंपरा))12:34 – 14:08
- शुभ(शुभ)14:08 – 15:42
- रोग(वर्जित (परंपरा))15:42 – 17:15
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:15 – 18:49
रात
- शुभ(शुभ)18:49 – 20:15
- अमृत(शुभ)20:15 – 21:42
- चर(सामान्य)21:42 – 23:08
- रोग(वर्जित (परंपरा))23:08 – 00:34 (1 सित॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))00:34 (1 सित॰) – 02:01 (1 सित॰)
- लाभ(शुभ)02:01 (1 सित॰) – 03:27 (1 सित॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:27 (1 सित॰) – 04:53 (1 सित॰)
- शुभ(शुभ)04:53 (1 सित॰) – 06:19 (1 सित॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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