पंचांग 26 नवंबर 2008
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
26 नवंबर 2008 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:47
सूर्यास्त17:56
चंद्रोदय06:22 (27 नव॰)
चंद्रास्त16:47
- मास:
- कार्तिक (अमांत) · मार्गशीर्ष (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1930 · विक्रम (चैत्रादि) 2065
- संवत्सर:
- सर्वधारी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- वृश्चिक
- चंद्र राशि:
- तुला 22:43 तक, फिर वृश्चिक
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- कृष्ण चतुर्दशी 20:11 तक, फिर कृष्ण अमावस्या 22:24 (27 नव॰) तक
- नक्षत्र
- विशाखा 05:22 (27 नव॰) तक, फिर अनुराधा 08:07 (28 नव॰) तक
- योग
- शोभन 15:03 तक, फिर अतिगण्ड 15:36 (27 नव॰) तक
- करण
- विष्टि 07:11 तक, फिर शकुनि 20:11 तक, फिर चतुष्पद 09:16 (27 नव॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:59 – 12:44परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:21 – 13:45
- यमगंड08:11 – 09:34
- गुलिक काल10:58 – 12:21
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:47 – 08:11
- अमृत(शुभ)08:11 – 09:34
- काल(वर्जित (परंपरा))09:34 – 10:58
- शुभ(शुभ)10:58 – 12:21
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:21 – 13:45
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))13:45 – 15:08
- चर(सामान्य)15:08 – 16:32
- लाभ(शुभ)16:32 – 17:56
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:56 – 19:32
- शुभ(शुभ)19:32 – 21:09
- अमृत(शुभ)21:09 – 22:45
- चर(सामान्य)22:45 – 00:22 (27 नव॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:22 (27 नव॰) – 01:58 (27 नव॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))01:58 (27 नव॰) – 03:35 (27 नव॰)
- लाभ(शुभ)03:35 (27 नव॰) – 05:11 (27 नव॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:11 (27 नव॰) – 06:48 (27 नव॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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