पंचांग 25 जुलाई 2009
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
25 जुलाई 2009 · शनिवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:09
सूर्यास्त19:12
चंद्रोदय09:18
चंद्रास्त21:43
- मास:
- श्रावण (अमांत)
- संवत:
- शक 1931 · विक्रम (चैत्रादि) 2066
- संवत्सर:
- विरोधी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कर्क
- चंद्र राशि:
- सिंह 00:39 (26 जुल॰) तक, फिर कन्या
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शनिवार
- तिथि
- शुक्ल चतुर्थी 19:10 तक, फिर शुक्ल पंचमी 17:11 (26 जुल॰) तक
- नक्षत्र
- पूर्वाफाल्गुनी 19:01 तक, फिर उत्तराफाल्गुनी 17:49 (26 जुल॰) तक
- योग
- वरीयान 10:30 तक, फिर परिघ 07:37 (26 जुल॰) तक
- करण
- वणिज 08:24 तक, फिर विष्टि 19:10 तक, फिर बव 06:05 (26 जुल॰) तक, फिर बालव 17:11 (26 जुल॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:14 – 13:07
- राहु काल09:25 – 11:03
- यमगंड14:18 – 15:56
- गुलिक काल06:09 – 07:47
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- काल(वर्जित (परंपरा))06:09 – 07:47
- शुभ(शुभ)07:47 – 09:25
- रोग(वर्जित (परंपरा))09:25 – 11:03
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))11:03 – 12:40
- चर(सामान्य)12:40 – 14:18
- लाभ(शुभ)14:18 – 15:56
- अमृत(शुभ)15:56 – 17:34
- काल(वर्जित (परंपरा))17:34 – 19:12
रात
- लाभ(शुभ)19:12 – 20:34
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))20:34 – 21:56
- शुभ(शुभ)21:56 – 23:18
- अमृत(शुभ)23:18 – 00:41 (26 जुल॰)
- चर(सामान्य)00:41 (26 जुल॰) – 02:03 (26 जुल॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))02:03 (26 जुल॰) – 03:25 (26 जुल॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))03:25 (26 जुल॰) – 04:47 (26 जुल॰)
- लाभ(शुभ)04:47 (26 जुल॰) – 06:10 (26 जुल॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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