पंचांग 10 अक्टूबर 2009
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
10 अक्टूबर 2009 · शनिवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:27
सूर्यास्त18:15
चंद्रोदय23:23
चंद्रास्त12:06
- मास:
- आश्विन (अमांत) · कार्तिक (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1931 · विक्रम (चैत्रादि) 2066
- संवत्सर:
- विरोधी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कन्या
- चंद्र राशि:
- मिथुन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शनिवार
- तिथि
- कृष्ण सप्तमी 03:24 (11 अक्टू॰) तक, फिर कृष्ण अष्टमी 01:25 (12 अक्टू॰) तक
- नक्षत्र
- मृगशीर्ष 08:26 तक, फिर आर्द्रा 07:17 (11 अक्टू॰) तक
- योग
- वरीयान 09:03 तक, फिर परिघ 06:24 (11 अक्टू॰) तक, फिर शिव 03:38 (12 अक्टू॰) तक
- करण
- विष्टि 16:21 तक, फिर बव 03:24 (11 अक्टू॰) तक, फिर बालव 14:25 (11 अक्टू॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:57 – 12:45
- राहु काल09:24 – 10:52
- यमगंड13:50 – 15:18
- गुलिक काल06:27 – 07:55
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- काल(वर्जित (परंपरा))06:27 – 07:55
- शुभ(शुभ)07:55 – 09:24
- रोग(वर्जित (परंपरा))09:24 – 10:52
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))10:52 – 12:21
- चर(सामान्य)12:21 – 13:50
- लाभ(शुभ)13:50 – 15:18
- अमृत(शुभ)15:18 – 16:47
- काल(वर्जित (परंपरा))16:47 – 18:15
रात
- लाभ(शुभ)18:15 – 19:47
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:47 – 21:18
- शुभ(शुभ)21:18 – 22:50
- अमृत(शुभ)22:50 – 00:21 (11 अक्टू॰)
- चर(सामान्य)00:21 (11 अक्टू॰) – 01:52 (11 अक्टू॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))01:52 (11 अक्टू॰) – 03:24 (11 अक्टू॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))03:24 (11 अक्टू॰) – 04:55 (11 अक्टू॰)
- लाभ(शुभ)04:55 (11 अक्टू॰) – 06:27 (11 अक्टू॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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