पंचांग 12 फ़रवरी 2010

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

12 फ़रवरी 2010 · शुक्रवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:03
सूर्यास्त18:33
चंद्रोदय06:21 (13 फ़र॰)
चंद्रास्त17:12
मास:
माघ (अमांत) · फाल्गुन (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1931 · विक्रम (चैत्रादि) 2066
संवत्सर:
विरोधी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शिशिर · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मकर
चंद्र राशि:
मकर

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शुक्रवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 05:41 (13 फ़र॰) तक, फिर कृष्ण अमावस्या 08:21 (14 फ़र॰) तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 13:02 तक, फिर श्रवण 16:11 (13 फ़र॰) तक
योग
व्यतीपात 02:32 (13 फ़र॰) तक, फिर वरीयान 03:30 (14 फ़र॰) तक
करण
विष्टि 16:19 तक, फिर शकुनि 05:41 (13 फ़र॰) तक, फिर चतुष्पद 19:02 (13 फ़र॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:25 – 13:11
  • राहु काल11:22 – 12:48
  • यमगंड15:41 – 17:07
  • गुलिक काल08:30 – 09:56

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • चर(सामान्य)07:03 – 08:30
  • लाभ(शुभ)08:30 – 09:56
  • अमृत(शुभ)09:56 – 11:22
  • काल(वर्जित (परंपरा))11:22 – 12:48
  • शुभ(शुभ)12:48 – 14:15
  • रोग(वर्जित (परंपरा))14:15 – 15:41
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:41 – 17:07
  • चर(सामान्य)17:07 – 18:33

रात

  • रोग(वर्जित (परंपरा))18:33 – 20:07
  • काल(वर्जित (परंपरा))20:07 – 21:41
  • लाभ(शुभ)21:41 – 23:14
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))23:14 – 00:48 (13 फ़र॰)
  • शुभ(शुभ)00:48 (13 फ़र॰) – 02:22 (13 फ़र॰)
  • अमृत(शुभ)02:22 (13 फ़र॰) – 03:56 (13 फ़र॰)
  • चर(सामान्य)03:56 (13 फ़र॰) – 05:29 (13 फ़र॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))05:29 (13 फ़र॰) – 07:03 (13 फ़र॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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