पंचांग 4 सितंबर 2010
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
4 सितंबर 2010 · शनिवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:20
सूर्यास्त18:46
चंद्रोदय02:47 (5 सित॰)
चंद्रास्त15:18
- मास:
- श्रावण (अमांत) · भाद्रपद (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1932 · विक्रम (चैत्रादि) 2067
- संवत्सर:
- विकृति (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- सिंह
- चंद्र राशि:
- मिथुन 05:21 (5 सित॰) तक, फिर कर्क
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शनिवार
- तिथि
- कृष्ण दशमी 08:14 तक, फिर कृष्ण एकादशी 05:56 (5 सित॰) तक, फिर कृष्ण द्वादशी 03:01 (6 सित॰) तक
- नक्षत्र
- आर्द्रा 12:32 तक, फिर पुनर्वसु 10:52 (5 सित॰) तक
- योग
- व्यतीपात 02:46 (5 सित॰) तक, फिर वरीयान 23:21 (5 सित॰) तक
- करण
- विष्टि 08:14 तक, फिर बव 19:10 तक, फिर बालव 05:56 (5 सित॰) तक, फिर कौलव 16:32 (5 सित॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:08 – 12:58
- राहु काल09:26 – 11:00
- यमगंड14:06 – 15:40
- गुलिक काल06:20 – 07:53
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- काल(वर्जित (परंपरा))06:20 – 07:53
- शुभ(शुभ)07:53 – 09:26
- रोग(वर्जित (परंपरा))09:26 – 11:00
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))11:00 – 12:33
- चर(सामान्य)12:33 – 14:06
- लाभ(शुभ)14:06 – 15:40
- अमृत(शुभ)15:40 – 17:13
- काल(वर्जित (परंपरा))17:13 – 18:46
रात
- लाभ(शुभ)18:46 – 20:13
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))20:13 – 21:40
- शुभ(शुभ)21:40 – 23:06
- अमृत(शुभ)23:06 – 00:33 (5 सित॰)
- चर(सामान्य)00:33 (5 सित॰) – 02:00 (5 सित॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))02:00 (5 सित॰) – 03:27 (5 सित॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))03:27 (5 सित॰) – 04:53 (5 सित॰)
- लाभ(शुभ)04:53 (5 सित॰) – 06:20 (5 सित॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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