पंचांग 19 मार्च 2011

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

19 मार्च 2011 · शनिवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:40
सूर्यास्त18:45
चंद्रोदय18:27
चंद्रास्तनहीं
मास:
फाल्गुन (अमांत)
संवत:
शक 1932 · विक्रम (चैत्रादि) 2067
संवत्सर:
विकृति (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शिशिर · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मीन
चंद्र राशि:
सिंह 16:13 तक, फिर कन्या

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शनिवार
तिथि
शुक्ल पूर्णिमा 23:40 तक, फिर कृष्ण प्रतिपदा 19:42 (20 मार्च) तक
नक्षत्र
पूर्वाफाल्गुनी 11:00 तक, फिर उत्तराफाल्गुनी 07:49 (20 मार्च) तक
योग
शूल 09:39 तक, फिर गण्ड 05:13 (20 मार्च) तक, फिर वृद्धि 00:48 (21 मार्च) तक
करण
विष्टि 13:39 तक, फिर बव 23:40 तक, फिर बालव 09:40 (20 मार्च) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:18 – 13:06
  • राहु काल09:41 – 11:11
  • यमगंड14:13 – 15:43
  • गुलिक काल06:40 – 08:10

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • काल(वर्जित (परंपरा))06:40 – 08:10
  • शुभ(शुभ)08:10 – 09:41
  • रोग(वर्जित (परंपरा))09:41 – 11:11
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))11:11 – 12:42
  • चर(सामान्य)12:42 – 14:13
  • लाभ(शुभ)14:13 – 15:43
  • अमृत(शुभ)15:43 – 17:14
  • काल(वर्जित (परंपरा))17:14 – 18:45

रात

  • लाभ(शुभ)18:45 – 20:14
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))20:14 – 21:43
  • शुभ(शुभ)21:43 – 23:12
  • अमृत(शुभ)23:12 – 00:42 (20 मार्च)
  • चर(सामान्य)00:42 (20 मार्च) – 02:11 (20 मार्च)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))02:11 (20 मार्च) – 03:40 (20 मार्च)
  • काल(वर्जित (परंपरा))03:40 (20 मार्च) – 05:09 (20 मार्च)
  • लाभ(शुभ)05:09 (20 मार्च) – 06:39 (20 मार्च)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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