पंचांग 13 सितंबर 2011

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

13 सितंबर 2011 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:21
सूर्यास्त18:39
चंद्रोदय19:02
चंद्रास्त06:54
मास:
भाद्रपद (अमांत) · आश्विन (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1933 · विक्रम (चैत्रादि) 2068
संवत्सर:
खर (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
सिंह
चंद्र राशि:
मीन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 17:01 तक, फिर कृष्ण द्वितीया 19:20 (14 सित॰) तक
नक्षत्र
पूर्वभाद्रपदा 07:02 तक, फिर उत्तरभाद्रपदा 09:48 (14 सित॰) तक
योग
शूल 08:26 तक, फिर गण्ड 09:12 (14 सित॰) तक
करण
कौलव 17:01 तक, फिर तैतिल 06:08 (14 सित॰) तक, फिर गर 19:20 (14 सित॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:05 – 12:55
  • राहु काल15:34 – 17:07
  • यमगंड09:26 – 10:58
  • गुलिक काल12:30 – 14:02

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))06:21 – 07:54
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:54 – 09:26
  • चर(सामान्य)09:26 – 10:58
  • लाभ(शुभ)10:58 – 12:30
  • अमृत(शुभ)12:30 – 14:02
  • काल(वर्जित (परंपरा))14:02 – 15:34
  • शुभ(शुभ)15:34 – 17:07
  • रोग(वर्जित (परंपरा))17:07 – 18:39

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))18:39 – 20:07
  • लाभ(शुभ)20:07 – 21:34
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:34 – 23:02
  • शुभ(शुभ)23:02 – 00:30 (14 सित॰)
  • अमृत(शुभ)00:30 (14 सित॰) – 01:58 (14 सित॰)
  • चर(सामान्य)01:58 (14 सित॰) – 03:26 (14 सित॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:26 (14 सित॰) – 04:54 (14 सित॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))04:54 (14 सित॰) – 06:22 (14 सित॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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